लखनऊ का सरताज गोमती नगर

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ये लखनऊ की सरज़मीं

कमल किशोर

लखनऊ का नाम आते ही प्रथम दृ़ष्टया जो छवि उभरती है वह नवाबी नगरी की शक्ल में, मगर बदलाव की बयार ने पूरे देश और विश्व के साथ-साथ यहां भी अपना प्रभाव छोड़ा। जिसके फलस्वरूप लखनऊ में भी बहुत कुछ बदल गया है। पतित पावनी गोमती के तट पर बसा और इसी नाम से जाना जाने वाला गोमती नगर अपनी तमाम खासियतों के लिये प्रसिद्ध है- आधुनिक चकाचौंध हो या फिर स्काई लाइन। यहां आपको सब कुछ मिलेगा, एक तरफ जहां फाइवस्टार होटल देशी और विदेशी मेहमानों को आकर्षित करते हैं वहीं तमाम मल्टीनेशनल कम्पनियों के कार्यालय भी स्थापित हो रहे हैं। अपने नित नये निर्माण के चलते गोमती नगर सभी को आकर्षित कर रहा है…।

उत्तर प्रदेश की चर्चा बिना लखनऊ के अधूरी है उसी प्रकार लखनऊ की चर्चा बिना गोमतीनगर के अधूरी है। छोटे-छोटे लगभग बीस खण्डों के समूह को मिलाकर बसा हुआ गोमती नगर खास बनता गया। सुल्तानपुर, फैजाबाद रोड से जुडऩे के साथ ही शहीद पथ से जुड़ाव ने भी इसकी भव्यता में चांद लगाये हैं। यहां प्रतिष्ठित इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान केन्द्र साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक गतिविधियों का मुख्य केन्द्र है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की स्थापना हो या आंबेडकर स्मारक, लोहिया अस्पताल और जनेश्वर मिश्र पार्क ने यहां रौनक में काफी इजाफा किया है। गोमतीनगर विस्तार में लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा बनवाया गया लगभग 379 एकड़ पार्क एशिया का सबसे बड़ा पार्क है। बोटिंग की सुविधा से लेकर मार्निंग वाक और जिम की सुविधाएं यहां उपलब्ध है। इसी गोमती नगर का अहम हिस्सा है पत्रकारपुरम। पत्रकारपुरम बाजार की भी अपनी अलग विशेषता है आस-पास के इलाके के लोगों के लिये ये बाजार खास अहमियत रखता है। विपुल खंड, विनीत खंड, विश्वास खंड या विभूतिखंड के लोग हों सभी के लिए पत्रकार पुरम शॉपिंग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।

कई नामचीन कम्पनियों के शोरूम और खाने पीने के लिये खुले रेस्टोरेेंट यहां के लोगों को तो भाते ही हैं बाहर से आने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं। वैसे तो सन् 1980 के बाद से यहां कुछ न कुछ होना शुरू हो गया था मगर आधिकारिक तौर पर देखा जाये तो लगभग बीस वर्ष पूर्व गोमती नगर के निर्माण में तेजी शुरू हुई। इस महत्वपूर्ण शहर को लेकर कई दिलचस्प, रोचक कहानियां भी प्रचलित हैं। ऐसा ही एक दृष्टांत इसके खंडों के नामों को लेकर भी है जैसे विभूतिखंड, विजय खंड, विश्वास खंड, विराम खंड, विनम्र खंड, विशेष खंड, विशाल खंड आदि में ‘इसकी पुनरावृत्ति को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय रहता है। जानकारों से चर्चा करने से कई बिन्दु सामने आये। कहते हैं इसकी शुरुआत अस्सी के दशक में हुई और जैसे-जैसे इसका विस्तार होता गया इसके खंडों का नाम भी जुड़ता गया। इसके विकास में कई तरह के विरोध कई आदालती कार्यवाहियां भी सामने आयीं और उनमें सफलता मिलने के अहसास में विजय खंड नाम रखा गया। इसी के फलस्वरूप जब विश्वास फलित हुआ तो विश्वास खंड रखा दिया गया। इसी तरह मिलता-जुलता नाम विवेक खंड रखा गया और फिर चल निकला इसका का सिलसिला और इससे जुड़ते गये ‘इससे सजे नाम से पूरे गोमती नगर की विशेषता शोभित है। गोमती नगर दिनो दिन अपने अस्तित्व में विस्तार पाता जा रहा है। लखनऊ का यह क्षेत्र ऐसा है कि इसके किसी न किसी हिस्से में कुछ न कुछ विकास कार्य हुआ ही करता है।

क्यों खास है गोमती नगर

गोमतीनगर में साहित्यिक – सांस्कृतिक गतिविधियां अपने चरम पर हैं तो इसका बहुत बड़ा श्रेय गोमती नगर का भी है। गोमती नगर में ही शोभायमान संगीत नाटक अकादमी है जिसके दो सभागार हैं। और शायद सबसे ज्यादा गरिमामय आयोजन यहीं होते हैं। कभी जो रुतबा रवीन्द्रालय या राय उमा नाथ बली को हासिल था लगभग वहीं रुतबा संगीत नाटक अकादमी को हासिल है। पास ही पर्यटन भवन का ऑफिस है इसमें भी आए दिन सांस्कृतिक आयोजन हुआ करते हैं। बौद्ध शोध-संस्थान भी यहीं स्थित है जो ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देता है ऐसे शानदार समारोहों का साक्षी होता है। इसके कई रंगारंग कार्यक्रम, फूड फेस्टिवल होते रहते हैं। यहां से कुछ दूरी पर जनेश्वर पार्क स्थित है जो गोमती नगर की भव्यता को महिमा मंडित करने में अपनी भूमिका निभाता है, खादी महोत्सव, राजनैतिक मंवन शिविर आदि …. आयोजित होते हैं।
सांस्कृति-सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न आयोजनों की हृदय स्थली होने के साथ ये आई.टी.एवं एजूकेशन हब भी है। यहां प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने के एक से बढ़कर एक स्कूल व संस्थान मौजूद हैं। कैप्टन मनोज पांडेय चौराहे के पास द स्टीट्यूट ऑफ चार्टेड एकाउंट ऑफ इंडिया की ब्रांच है, यहां सीए की तैयारी कर रहे छात्रों के लिये पढ़ाई के साथ साथ टे्रनिंग भी दी जाती है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में भी प्रबंधन कोर्सेज भी समुचित पढ़ाई की व्यवस्था है। इसी के साथ-साथ एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज तथा द इंस्टीट्यूट आफ कास्ट एकाउंटेंट ऑफ इंडिया भी यहीं स्थित है जो विभिन्न क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा उपलब्ध कराकर जीवन की नयी-नयी उड़ानों को पंख देने का काम करता है। इसके अलावा भी बहुत सी खूबियों से लैस है लखनऊ का मुकुट गोमतीनगर… जैसे 1990 पर वूमेन पॉवर लाइन, अन्तरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम, डायल 100 कार्यालय, लखनऊ मैट्रो कार्यालय, सूचना आयोग, महिला आयोग, नये बिजली घर तथा एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं… इत्यादि।

ये और हो जाये तो मजा आ जाये

  • वेव सिनेमा के पीछे बेहनपुरवा की नालियों की सफाई व मरम्मत।
  • विशालखंड, विवेक  खंड, विकास खंड में अवैध रूप से चल रह डेरियों की दिशा में उचित कदम।
  • पूरे क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था जो हमारे प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वस्छ-भारत का एक अहम हिस्सा भी है।
  • कूड़ा कलेक्षन का काम, सड़कों की नियमित सफाई का कार्य।
  • शुद्ध पेयजल की आपूर्ति का समुचित प्रबन्ध, साथ-साथ यहां भी टंकियों की नियमित सफाई का कार्य।
  • सड़कों पर अवैध पार्किंग के चलते आए दिन जाम की समस्य का पांव पसारना।
  • पॉलीटेक्रीक चौराहे के पास जबरदस्त लगने वाले जाम से निजात।
  • इस तरह की छोटी-छोटी किन्तु महत्वपूर्ण कमियों का यदि निस्तारण हो जायेगा तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का यह बेहद अहम हिस्सा और भी खास हो जायेगा।

विश्व-स्तरीय स्टेशन

गोमतीनगर को विश्व-स्तरीय स्टेशन का दर्जा प्राप्त होने की दिशा में भी कदम उठ चुके हैं। सच पूछो तो इस की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के समय से ही हो गयी थी। पूर्व प्रधानमंत्री ने इस स्टेशन को टर्मिनल के रूप में विकसित करने की आधार शिला रखी थी। तीसरे चरण में टर्मिनल बनाने की दृष्टि से 2016 में रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने शिलान्यास किया था। उस समय उन्होंने कहा भी था कि गोमतीनगर टर्मिनल को विश्व-स्तरीय बनाया जायेगा। रेलवे बोर्ड ने पीपीपी मॉडल के अन्तर्गत स्टेशन का काम अपनी निर्माण इकाई को दिया था। बोर्ड ने इसके लिये १०८ करोड़ रुपये भी जारी किये थे। इसमें सिग्रल और आरक्षण की व्यवस्था, दो नये प्लेटफार्म ट्रेनों की धुलाई के लिय वाशिंगपिट के अलावा टर्मिनल भवन का निर्माण होना शामिल था। अब इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को रेलवे ने अपनी संस्था राइट्स को सौंप दिया है। जैसी कल्पना की जा रही है उस हिसाब से एयरपोर्ट की तर्ज पर यात्रियों के लिये ठहरने की समुचित व्यवस्था होगी। यह दो मंजिला कांच का टर्मिनल होगा। 45 लिफ्ट अैर एक्सेलेटर होंगे। वाई-फाई जोन और खानपान के लिये फूडकोर्ट होंगे। बड़े पैमाने पर पार्किंग व्यवस्था होगी, जिसमें लगभग दो हजार कारें खड़ी हो सकें। ऐसी और इस तरह की कई आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा गोमतीनगर स्टेशन।