- आंगनवाड़ी केन्द्रों पर किशोरियों की हुई बैठक
- आयरन की नीली गोलियाँ बांटी गयीं
लखनऊ, 27 सितम्बर 2018: लखनऊ जिले के सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर लाडली दिवस का आयोजन किया गया, इस अवसर पर किशोरियों को पोषाहार बांटा गया। उन्हें पोषाहार से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर के भी दिखाए गए ताकि उसका स्वाद और बढ़े तथा वह स्वादानुसार उसका प्रयोग करें। किशोरियों को पोषाहार की उपयोगिता के बारे में भी जानकारी दी गयी।
मोहनलालगंज की बाल विकास परियोजना अधिकारी सरोज पाण्डेय ने कहा कि इस अवसर पर किशोरियों की बैठक कर उन्हें माहवारी स्वच्छता तथा एनीमिया के बारे जानकारी दी गयी। आयरन की नीली गोली देकर उन्हें बताया गया कि सप्ताह में एक गोली उन्हें खानी है ताकि खून की कमी न हो। इसके साथ ही साथ वे अपने स्वास्थय का भी ध्यान रखें। इसके लिए आवश्यक है कि वह नियमित रूप से प्रोटीनयुक्त पदार्थ जैसे विभिन्न प्रकार की दालें, हरी सब्जियां, मौसमी फल तथा लोकल खाद्य पदार्थों का सेवन करें व उन्हें जो पोषाहार आंगनवाड़ी केन्द्रों पर मिलता है उसका नियमित रूप से सेवन करें ताकि उन्हें पर्याप्त पोषण मिले। इसके साथ ही साथ उन्हें किशोरियों को स्वछता और साफ़ सफाई के बारे में जानकारी दी। अगर वें महावारी के दौरान साफ़ सफाई का धयान रखती है तो वह कई प्रकार की समस्याओं और होने वाले संक्रमण से बच सकती है। किशोरियों को कपडे की जगह सेनेटरी नैपकिन के उपयोग के बारे में बताया गया।
क्यूँ मनाया जाता है लाडली दिवस ?
हर माह की 25 तारिख को आंगनवाड़ी केन्द्रों पर लाडली दिवस मनाया जाता है| इस अवसर पर 11-18 वर्ष की किशोरियों को केंद्र पर बुलाया जाता है। उन्हें पोषाहार दिया जाता है और निम्नलिखित बिन्दुओं पर उनसे चर्चा की जाती है:
- शारीरिक प्रजनन एवं स्वास्थय सम्बन्धी जानकारी
- पोषण सम्बन्धी जानकारी
- व्यक्तिगत स्वच्छता
- आयरन की गोली का महत्व और कुपोषण सम्बन्धी जानकारी
सरोज पांडे ने बताया कि किशोरियों को उनके शरीर के लिए बढ़ती मांग के अनुसार सही पोषण अत्यंत आवश्यक है | इस अवस्था में अधिक पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है। कैल्शियम व आयरनयुक्त आहार लेना आवश्यक है । खान पान की आदतें, पोषक तत्वों की आवश्यकता, उनकी प्राप्ति एवं संतुलित आहार के बारे में जानकारी देना ताकि उनका स्वास्थय अच्छा हो।
उन्होंने कहा कि इस आयु में सही जानकारी देना एवं परामर्श दिया जाना बहुत आवश्यक है| सही जानकारी न मिल पाने के कारण किशोरावस्था में विभिन्न प्रकार के शारीरिक, प्रजनन एवं स्वास्थय सबंधी समस्याएं आ जाती हैं।ऐसी स्थिति में, किशोरियों को उनके शारीरिक बदलाव, स्वास्थय एवं प्रजनन के बारे में सही जानकारी एवं परामर्श दिया जाना अत्यंत आवश्यक है।






