ऊर्जा मंत्री द्वारा उत्पादन गृहों की गीली राख के निस्तारण पर भाड़ा वसूलने के प्राविधान पर पुनर्विचार हेतु केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री भारत सरकार को भेजा गया पत्र
लखनऊ, 13 दिसम्बर 2018: बिजली दरों में बढ़ोत्तरी रोकने के लिए उपभोक्ता परिषद ने अभी से लामबंदी शुरू कर दिया है इस मामले को लेकर वह आज प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से मिले।
बता दें कि कल जहाॅ राजधानी लखनऊ में बिजली दर पर सार्वजनिक सुनवाई नियामक आयोग में होनी है, वहीं उपभोक्ता परिषद ने बिजली दरों में कोई बढ़ोत्तरी गुपचुप दरवाजे से भी न होने पाये को लेकर अपनी पेशबन्दी शुरू कर दी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा से शक्ति भवन में मुलाकात कर उपभोक्ता हितों पर बिजली दर के मुद्दे पर चर्चा की और पूरी स्थिति से विस्तार से अवगत कराया।
गौरतलब है कि इसी चर्चा के दौरान उपभोक्ता परिषद द्वारा पूर्व में उठाये गये एक जनहित के मुद्दे जिसमें पूरे देश के कोयला आधारित उत्पादन गृहों की गीली राख को फ्री में डिस्पोज करने पर 300 किमी की परिधि तक उत्पादन निगमों को भाड़ा भी वहन किये जाने के मामले पर भारत सरकार द्वारा बनाये गये कानून जिसके चलते बिजली उपभोक्ताओं पर बड़ा भार पड़ना तय है, में बदलाव किये जाने पर भी चर्चा की, उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा एक नया कानून बनाया गया था, जिसमें उत्पादन गृहों की राख निस्तारण के लिये एनएचएआई को हाइवे हेतु उपयोग करने के लिये उत्पादन गृहों को फ्री में राख के साथ 300 किमी तक उसका भाड़ा भी उत्पादन गृहों को देना अनिवार्य किया गया था।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मा ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वस्त किया कि गीली राख के निस्तारण के मामले में उपभोक्ताओं पर कोई भार न पड़े इसलिये केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री आरके सिंह को एक पत्र भेज दिया गया है जिसमें कानून में फेरबदल के लिये पुर्नविचार की माॅग की गयी है। ऊर्जा मंत्री द्वारा केन्द्र को भेजे गये पत्र की एक प्रति उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को पूर्व में उनके द्वारा ऊर्जा मंत्री को सौपे गये ज्ञापन के क्रम में सूचनार्थ एक प्रति दी गयी।
इस मामले पर ऊर्जा मंत्री की तरफ से केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री आरके सिंह को भेजे गये पत्र में यह मुद्दा उठाया गया है कि ‘‘उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के समस्त परियोजनाओं के राख बाॅध में लगभग 786.121 लाख टन राख उपलब्ध है, जिसे भारत सरकार अधिसूचना के अनुपालन में समान रूप से मात्रा विभक्त करते हुये 100, 200, 300 किमी तक राख परिवहन में लगभग रू0 11037.00 करोड़ व्यय करने होगे, साथ ही उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के समस्त इकाईयों के परिचालन से प्रतिवर्ष 105.56 लाख टन राख उत्सर्जित होगी, जिसके कारण राख परिवहन में प्रतिवर्ष रू. 1482.15 करोड़ व्यय करना होगा। राख परिवहन में सम्भावित व्यय के कारण विद्युत उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट दरों में लगभग रू. 0.39 वृद्धि होने की सम्भावना है। यह भी तथ्य संज्ञान में लाना है कि केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत उपभोक्ताओं को 24ग7 घंटे सस्ती बिजली दिये जाने का संकल्प लिया है इसलिये इसके कारण विद्युत उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाला जाना जनहित में नही है। ऊर्जा मंत्री द्वारा उपभोक्ताओं के हितों के दृष्टिगत वर्णित भारत सरकार की अधिसूचना के प्राविधानों में विचार करने की माॅग की गयी है और यह अनुरोध किया गया है कि राख परिवहन व्यय का वहन राख उपयोगकर्ता द्वारा किया जाय। यानी कि राख ले जाने वाला ही किराया वहन करें।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा निश्चित तौर पर जिस प्रकार से किसानों के स्टीमेट में जीएसटी से ऊर्जा मंत्री जी द्वारा भारत सरकार में पैरवी कर छूट दिलायी गयी थी अब इस मुद्दे पर भी ऊर्जा मंत्री के हस्तक्षेप से भविष्य में गीली राख के निस्तारण पर भी भाड़ा वसूलने का प्राविधान खत्म होगा।







