उपभोक्ता परिषद ने उप्र सरकार से उठायी माँग, सरकार विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-108 के तहत नियामक आयोग से लोकहित में करे अनुरोध, जिससे प्रदेश के उपभोक्ताओं को भी मिले राहत
लखनऊ, 19 दिसम्बर 2018: गुजरात सरकार द्वारा 24 घण्टे पहले घरेलू, वाणिज्यिक व किसानों के लगभग 625 करोड़ बिजली का बकाया माफ कर उन्हें यह सुविधा प्रदान कर दी गयी है कि वह अपना कटा कनेक्शन कोई भी उपभोक्ता रू. 500 जमा कर जुड़वा सकता है,और उसका पूरा बकाया माफ कर दिया जायेगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने यूपी सरकार से यह मांग उठायी है कि 30 नवम्बर, 2017 को जिस प्रकार से घरेलू ग्रामीणों व किसानों की दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी करायी गयी और वर्तमान में वर्ष 2018-19 की बिजली दरों की आज अन्तिम सुनवाई पूरी हो गयी। ऐसे में उप्र सरकार विद्युत अधिनियम-2003 की धारा-108 के तहत नियामक आयोग से यह अनुरोध करे कि लोकहित में घरेलू, ग्रामीण व किसानों सहित छोटे वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर लगने वाला रेगुलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत अविलम्ब समाप्त किया जाये और साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू अनमीटर्ड उपभोक्ताओं की जो दरें 01 अप्रैल, 2018 से 300 रू. प्रति किलोवाट से बढ़ाकर रू. 400 प्रति किलोवाट कर दी गयी थी, उसे पुनः रू 300 कराया जाये।
इस मामले में उपभोक्ता परिषद ने कहा कि जल्द ही गुजरात की तरह उप्र में भी उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से की बात की जायेगी और मिलकर उन्हें उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रस्ताव सौंपा जायेगा।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में केवल सरकारी विभागों पर लगभग 10 हजार करोड़ का बकाया है, जिसे सरकार बजटरी प्रोवीजन से विभाग को दिलाकर प्रदेश के घरेलू व किसानों की दरों में व्यापक कमी करा सकती है। प्रदेश की बिजली कम्पनियाँ विगत् वर्ष से 16 प्रतिशत रिटर्न ऑफ इक्युटी ले रही हैं, यानी कि नियामक आयोग से फायदा ले रही हैं। ऐसे में यदि प्रदेश सरकार चाहे तो ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत रिटर्न ऑफ इक्युटी में कमी करके दे सकती है। जब इसी रिटर्न आॅफ इक्युटी के सहारे बिजली कम्पनियाँ अभियन्ताओं को रू. 50 से ढ़ाई लाख तक नगद इनाम दक्षता बढ़ाने के नाम पर विगत् दिनों दिया तो अब जब सभी राज्य अपने विद्युत उपभोक्ताओं को राहत दे रही हैं तो उत्तर प्रदेश क्यों नहीं?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज गुजरात के मामले पर गुजरात नियामक आयोग अध्यक्ष से बात की। उन्होंने यह स्वीकार किया कि गुजरात में रिटर्न ऑफ इक्युटी के माध्यम से पहले भी विद्युत उपभोक्ताओं को इस प्रकार का लाभ दिया गया है। इस बार भी सरकार इन्हीं सब मदों से जो करोड़ों रूपया माफ किया है, भरपायी करेगी। आगे देखना है कि आयोग के सामने क्या प्रस्ताव आता है? लेकिन रिटर्न ऑफ इक्युटी के माध्यम से यदि बिजली कम्पनियाँ चाहें तो उसमें कटौती कर बिना सब्सिडी के किसी भी कन्ज्यूमर कैटेगरी को लाभ दे सकती हैं।







