पावर कार्पोरेशन द्वारा ग्रामीणों की बढ़वाई गयी दरों पर नया पेंच उपभोक्ता परिषद ने आयोग में दाखिल किया जनहित प्रत्यावेदन पर नया पेंच उपभोक्ता परिषद ने आयोग में दाखिल किया जनहित प्रत्यावेदन
लखनऊ, 07 जनवरी 2019: प्रदेश के ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को अक्टूबर 2018 से 24 घण्टे बिजली देने का लिखित वादा कर प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा विद्युत नियामक आयोग से वर्ष 2017-18 में बिजली दरों में व्यापक बढ़ोंत्तरी करायी, जो ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता पहले 1 किलो वाट पर रू. 180 देते थे, अब उन्हें रू0 400 देना पड़ रहा है लेकिन उन्हें विद्युत आपूर्ति 6 घण्टे कम मिल रही है। जिसके विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज विद्युत नियामक आयोग में एक जनहित प्रत्यावेदन दाखिल करते हुए आयोग से यह मांग की कि जब आयोग ने बिजली कम्पनियों की बात मानकर ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 150 प्रतिशत तक वृद्धि की और अब जब उसे 24 विद्युत आपूर्ति न करके केवल 18 घण्टे और अनेकों जिलों में व्यवधान के चलते उससे भी कम विद्युत आपूर्ति की जा रही है तो ऐसे में आयोग का नैतिक दायित्व है कि आयोग ग्रामीणों किसानों व आम जनता की मौजूदा दरों में अविलम्ब कमी करे।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग अध्यक्ष श्री आरपी सिंह सदस्य श्री एसके अग्रवाल व केके शर्मा से यह मांग दोहरायी कि आयोग प्रदेश के ग्रामीण किसानों को अविलम्ब न्याय दिलाये। वर्ष 2017-18 में जब पावर कार्पोरेशन द्वारा ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति आक्टूबर से किये जाने की बात की गयी थी, उस दौरान उपभोक्ता परिषद ने कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि पावर कार्पोरेशन अक्टूबर 2018 से किसी भी हालत में ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति नहीं दे पायेगा और कार्पोरेशन का सिस्टम भी इस लायक नहीं है। उस दौरान पावर कार्पोरेशन इस बात पर अडिग था कि हम हर हाल में ग्रामीणों को 24 घण्टे आपूर्ति करेंगे और अब जब वह अपने वादे में फेल हो गया है तो आयोग को जनता के साथ न्याय करना चाहिए।
उपभोक्त परिषद अध्यक्ष ने यह भी मुद्दा उठाया कि 30 नवम्बर, 2017 को जब बिजली दरों में वृद्धि करायी गयी उस समय ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरें 1 किलो वाट पर रू0 300 थी और बिजली कम्पनियों ने विद्युत आपूर्ति बढ़ाने के नाम पर उसी टैरिफ आदेश में 1 अप्रैल 2018 से इसी दर को रू0 400 करा लिया था। जो ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ बड़ा अन्याय था।







