वाहनों को इलेक्ट्रिक करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार ने कसी कमर, जारी किये कई आदेश

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बिजली कम्पनियों के लिये सबसे बडी चुनौती उन्हें अपने सिस्टम को दोगुना से ज्यादा करना होगा अपग्रेड क्योंकि चार्जिग से बढेगा सिस्टम पर भारी भार, आदेश के तहत घरलू चार्जिग की दरें घरेलू टैरिफ ही होगी
लखनऊ, 02 फरवरी 2019: जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने जहाॅं भविष्य में वाहनों को बिजली से चलाने की योजना बनायी है वहीं अब देश के ऊर्जा क्षेत्र में इस पर काफी मंथन चल रहा है। सबसे बडी जिम्मेदारी देश की बिजली कम्पनियों पर आयेगी उसके लिये पारदर्शी कानून वर्तमान सिस्टम में दोगुना से ज्यादा की वृद्धि चार्जिग पर उचित टैरिफ को लेकर  विगत दिनों ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अनेको आदेश जारी किये गये हैं वहीं ऊर्जा मंत्रालय ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों के अन्तर्गत बिजली चार्जिग स्टेशनों के लिये लाइसेंस लेने की कोई आवश्यकता नही होगी और साथ ही ऊर्जा मंत्रालय द्वारा दिसम्बर 2018 में यह भी आदेश जारी किये गये हैं कि चार्जिंग स्टेशनों की दरें औसत विद्युत मूल्य से 15 प्रतिशत अधिक या कम हो सकती हैं। सभी घरेलू विद्युत वाहन जो घर में चार्ज होंगे उनकी दरें घरेलू ही होंगी।
बता दें कि कुछ दिनों दिल्ली विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली से चलने वाले वाहनों को चार्ज करने के लिये जो बिजली दर घोषित की गयी है वह रू0 5 से रू0 5.50 प्रति यूनिट के बीच है। देश की छोटी से बडी सभी वाहन निर्माता कम्पनियाॅं आजकल इलेक्ट्रिक वाहन की चार्जिग तकनीकी पर पूरी तरीके से अध्ययन में जुटी हैं वही अब सबसे बडा काम बिजली कम्पनियों के सिस्टम को सुदृण करने के लिये शुरू होने वाला है जो एक बडी समस्या है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली से चलने वाले वाहनों की चार्जिग सबसे बडी समस्या होगी क्योंकि कोई भी वाहन लगभग 2 से 3 किलोवाट का लोड लेगा और उसे चार्ज करने में लगभग 7 से 8 घण्टे लग सकते हैं।
तकनीकी विशषज्ञों का मानना है कि 1 गाडी को चार्ज करने में लगभग 6 से 8 यूनिट खर्च होगी। इसके जरिये लगभग 100 किलोमीटर तक की यात्रा की जा सकेगी। यदि रू0 5.50 की दरें प्रति यूनिट मान ली जायें तो लगभग 42 रू0 खर्च होगा 100 किलोमीटर में। जो पेट्रोल और डीजल के मुकाबले काफी कम होगा। लेकिन सबसे बडी समस्या बिजली कम्पनियों के ऊपर आने वाले समय में आयेगी क्योंकि जैसे जैसे इलेक्ट्रिक वाहन बढेंगे सिस्टम की क्षमता को भी बडे पैमाने पर अपग्रेट करना  पडेगा। कुछ तकीनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि टर्बो चार्जिंग जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन मात्र 1 से डेड घंटे में फुल चार्ज हो जायेगा उसमें विद्युत का भार 10 किलोवाट के ऊपर जा सकता है जो बिजली कम्पनियों के सिस्टम पर मुसीबत पैदा कर सकता है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पूरे देश में इसको लेकर काफी अध्यन हो रहा है। राजधानी दिल्ली में अगले 5 सालों में हजारों चार्जिंग केन्द्र बनाने की योजना है। वर्तमान में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी प्राविधानों के बाद बिजली कम्पनियों में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिग के लिये जरूरी ढांचागत सुविधा तैयार किया जाना एक बडी चुनौती है। जो आने वाले समय मंे बिजली क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।

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