पावर कार्पोरेशन ने जब ग्रामीण व किसानों की वर्ष 2017-18 में आयोग से करायी थी व्यापक वृद्धि तो किया था लिखित वादा अक्टूबर 2018 से ग्रामीणों को मिलेगी 24 घण्टे बिजली इसलिये दरों में वृद्धि जायज और अब शिडयूल केवल 18 घण्टे
लखनऊ, 05 जनवरी 2019: वर्तमान में जब वर्ष 2018-19 की बिजली दर सम्बन्धी सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो गयी है और बिजली दर का निर्धारण अन्तिम चरण में है। ऐसे में उपभोक्ता परिषद ने कहा कि नैतिक आधार पर उप्र की सरकार को ग्रामीण किसानों व आम जनता की बिजली दरों में कमी करने के लिये विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत स्वतः विद्युत नियामक आयोग से अविलम्ब अनुरोध करना चाहिए।
गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 में जब ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में 50 से 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई उस दौरान जब टैरिफ की सुनवाई चल रही थी तो उपभोक्ता परिषद ने ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में व्यापक वृद्धि का विरोध किया था, इसके बावजूद भी आयोग द्वारा अनमीटर्ड घरेलू उपभोक्ता जो पहले 1 किलोवाट पर 180 रू0 देते थे। उन्हें आज 400 रू0 देना पड़ रहा है और इसी प्रकार जो मीटर्ड घरेलू ग्रामीण उपभोक्ता है उन्हें भी लगभग शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के बराबर मीटर्ड यूनिट का चार्ज देना पड़ रहा है। उस दौरान उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस बात पर लिखित आपत्ति उठायी थी कि ग्रामीण व शहरी उपभोक्ताओं की सुविधाएं बराबर नहीं है और बिजली आपूर्ति के घण्टों में भी अन्तर है इसलिये ग्रामीण की दरों में व्यापक वृद्धि न की जाये। उस दौरान उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा नियामक आयोग को लिखित में यह सौंपा गया था कि अक्टूबर 2018 से ग्रामीण उपभोक्ताओं को 24 घण्टे बिजली दी जायेगी। इसलिये शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं की आपूर्ति बराबर हो जायेगी इसलिये ग्रामीणों की दरों में वृद्धि पूरी तरह उचित है और जरूरी भी।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज टैरिफ आदेश वर्ष 2017-18 का वह अंश जिसमें पावर कार्पोरेशन ने अक्टूबर 2018 से ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति की प्रतिबद्धता स्वीकार की थी और वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद पावर कार्पोरेशन द्वारा जारी विद्युत आपूर्ति शिडयूल के उस अंश का भी खुलासा कर रहा है जिसमें 12 जनवरी 2019 तक 18 घण्टे विद्युत आपूर्ति की बात की जा रही है। यानि कि अक्टूबर 2018 से लेकर अब तक ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को 6 घण्टे विद्युत आपूर्ति कम की गयी है लेकिन बिजली दरों में जो वृद्धि करायी गयी थी वह 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति के आधार पर थी। ऐसे में उ0प्र0 सरकार व विद्युत नियामक आयोग की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह ग्रामीण किसानों व आम जनता की बिजली दरों में कमी कराये।







