उपभोक्ता के उत्पीड़न पर उपभोक्ता परिषद की अवमानना याचिका पर विद्युत नियामक आयोग का ऐतिहासिक फैसला
लखनऊ, 20 फरवरी 2019: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाये गये कानून के तहत राजाजीपुरम् में एक उपभोक्ता बृजेश मिश्रा द्वारा अपने भार की परिधि में कराए जा रहे निर्माण कार्य पर उन्हें लेसा अभियन्ताओं द्वारा विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-126 के तहत गलत तरीके से फँसाये जाने के मामले पर आज उस समय नया मोड़ आ गया, जब राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा लेसा की इस नियम विरूद्ध कार्यवाही के खिलाफ मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की जाँच टीम व लेसा की जाँच टीम के खिलाफ उप्र विद्युत नियामक आयोग ने दाखिल अवमानना वाद पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया।
आयोग अध्यक्ष आरपी सिंह के निर्देश पर सचिव, विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रबन्ध निदेशक मध्यांचल, मुख्य अभियन्ता (वाणिज्य), मध्यांचल व अधिशासी अभियन्ता, राजाजीपुरम्, लेसा के खिलाफ विद्युत अधिनियम-2003 की धारा-142 के तहत नोटिस जारी करते हुए 5 मार्च को समय 3ः00 बजे आयोग में समस्त कागजों के साथ तलब कर लिया गया है।

विद्युत नियामक आयोग द्वारा उपभोक्ता परिषद की अवमानना याचिका पर सुओ मोटो फैसला लिया गया है। चूँकि मामला गंभीर है, इसलिए आयोग द्वारा विद्युत अधिनियम, 2003 की सबसे बड़ी धारा के तहत कार्यवाही प्रारम्भ की गयी है। गौरतलब है कि उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा आयोग के समक्ष साक्ष्यों के साथ यह मुद्दा उठाया गया था कि लेसा अभियन्ताओं द्वारा टैरिफ की धारा-14 का उल्लंघन कर उपभोक्ता को गलत तरीके से फॅसाया गया, जबकि मीटर्ड विद्युत उपभोक्ता अपनी भार की परिधि में अपने परिसर में निर्माण कार्य करा रहा था, जिसे कानूनन अधिकार था।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह तो एक उदाहरण मात्र है। इस प्रकार की कार्यवाही पूरे प्रदेश में चल रही है और विद्युत उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान कर उनका उत्पीड़न कराया जा रहा है। राजधानी लखनऊ में ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बावजूद भी अभी तक उपभोक्ता को न तो न्याय दिया गया और न ही दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की गयी, जो अपने आपमें गंभीर मामला है। अब जब आयोग ने पूरे प्रकरण पर कठोर कदम उठा लिया है तो मध्यांचल व लेसा में हड़कम्प मचा है। इसी प्रकरण पर कल ऊर्जा मंत्री द्वारा प्रबन्ध निदेशक, मध्यांचल को शीघ्र उपभोक्ता को न्याय देने के निर्देश दिए गये थे।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत दोष सिद्ध होने पर आयोग किसी पर भी व्यक्तिगत रूप से रू0 एक लाख तक की पैनाल्टी लगा सकता है। उपभोक्ता उत्पीड़न के एक मामले में आज से कई वर्ष पहले आयोग ने प्रबन्ध निदेशक, दक्षिणांचल के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से एक लाख की पैनाल्टी लगा दी थी, जो मामला काफी चर्चित था। इस बार भी जिस प्रकार से नियम विरूद्ध कार्यवाही की गयी है, उससे दोषी अभियन्ताओं का फँसना तय है।
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