दलित अभियन्ताओं के साथ भेदभाव का मामला पहुॅचा ऊर्जा मंत्री के दरबार

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ऊर्जा मंत्री ने दिया आश्वासन: प्रबन्धन नहीं करने पायेगा किसी के साथ भेदभाव एसोशिएसन की मांगो पर गम्भीरता से होगा विचार

लखनऊ, 10 जून 2019: पावर कारपोरेशन प्रबन्धन व कम्पनी प्रबन्धन द्वारा लगातार दलित अभियन्ताओं के हितों के साथ किये जा रहे भेदभाव पूर्ण रवैये को लेकर उप्र पावर आफीसर्स एसोशिएसन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार के नेतृत्व 4 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल एसोशिएसन सचिव, आरपी केन, संगठन सचिव, राधेश्याम व अजय कुमार ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की और एक ज्ञापन सौपा।

एसोशिएसन के कार्यवाहक अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री को यह अवगत कराया कि प्रदेश की सभी बिजली कम्पनियों में बड़े पैमाने पर अटैच दलित अभियन्ताओं के पास बैठने तक कुर्सी नहीं है। स्थानान्तरण व अनुशासनात्मक  विंग की पूरी चेन में नीचे से लेकर ऊपर तक कोई भी दलित अभियन्ता तैनात नहीं है। बड़े पैमाने पर फर्जी शिकायतों को आधार पर बनाकर अभियन्ताओं पर कार्यवाही की जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिजली कम्पनियों में उन क्षेत्रों में जहाॅ कोई जाना नहीं चाहता वहाॅ दलित अभियन्ताओं को सुधार के लिये भेजा जाता है और आये दिन मानक न पूरा करने के लिये उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही स्वरूप दण्ड दिया जाता है, जिससे पूरे प्रदेश के दलित अभियन्ताओं में भारी रोष है।

एसोशिएसन ने ऊर्जा मंत्री के सामने यह मुद्दा भी उठाया कि विगत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत बड़े पैमाने पर दलित अभियन्ताओं को रिवर्ट किया गया और अब जब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा पदोन्नतियों में आरक्षण को संवैधानिक करार दिया गया है और जिसकी लड़ाई दलित अभियन्ता लगातार लड़ रहे है और वर्तमान में पूरा मामला उत्तर प्रदेश शासन के अधीन विचाराधीन है, ऐसे में जब तक रिवर्ट दलित अभियन्ताओं को पदोन्नति न प्रदान कर दी जाय उन्हें स्थानान्तरण नीति से बाहर रखा जाय और उनका स्थानान्तरण पदोन्नति देने के बाद ही किया जाय, उसमें एसोशिएसन को कोई आपत्ति नहीं है।

ऊर्जा मंत्री ने एसोशिएसन के पदाधिकारियों को यह आश्वस्त किया कि मेरी सरकार में किसी भी कार्मिक के साथ न ही कोई भेदभाव हुआ है और न ही होने पायेगा, आप सभी उपभोक्ता सेवा में पूरी ईमानदारी से काम करें। प्रबन्धन द्वारा किसी भी स्तर पर आपका उत्पीड़न नहीं होने दिया जायेगा। एसोशिएसन की सभी माॅगों पर गम्भीरता से विचार होगा।

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