- बिजली चोरी का केस लिया वापस, बताया जुर्माना भी नहीं लगेगा
- राज्य विद्युत विद्युत उपभोक्ता परिषद कि बड़ी जीत
लखनऊ, 21 फरवरी 2019: अपने परिसर में निर्माण करा रहे उपभोक्ता को बिजली अधिकारियों ने इतना परेशान किया कि उसे राज्य विद्युत विद्युत उपभोक्ता परिषद की शरण लेनी पड़ी, उपभोक्ता परिषद ने पीड़ित का पूरा साथ देते हुए इस मामले को ऊर्जा मंत्री के साथ विद्युत नियामक आयोग के सामने मजबूती से उठाया, और फिर 6 दिन की चली लम्बी लड़ाई के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों का उपभोक्ता को उत्पीड़त करने का कारनामा खुलकर सामने आ गया। हालात अब यह हो गए की जब अधिकारियों का गला फंसा तो वह विभिन्न समाचार पत्रों में प्रेसनोट भेजकर अपनी गलती मान रहे हैं और उपभोक्ता के प्रति बिजली चोरी का मामला वापस ले लिया। लेकिन अभी इस मामले पर सबसे बड़ा फैसला आना बाकी है क्योंकि विद्युत नियामक आयोग द्वारा इस मामले पर पांच मार्च को सुनवाई होनी है।
बता दें कि राज्य विद्युत विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उपभोक्ता को न्याय दिलाने की हमारी 6 दिन चली लम्बी लड़ाई के बाद मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने अपनी गलती मानी, जिसमें उपभोक्ता को जो विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-126 के तहत गलत तरीके से फँसाया था। वह नोटिस निरस्त की और मीडिया को प्रेस नोट भेजकर अपनी गलती मानी। उन्होंने कहा कि सत्य की जीत हुयी और इस पूरे मामले में न्याय दिलाने में ऊर्जा मंत्री की अहम् भूमिका रही।
इस मामले में विद्युत नियामक आयोग द्वारा उपभोक्ता परिषद् की अवमानना याचिका पर प्रबन्ध निदेशक मध्यांचल, मुख्य अभियन्ता (वाणिज्य), मध्यांचल व अधिशासी अभियन्ता, राजाजीपुरम्, लेसा के खिलाफ विद्युत अधिनियम-2003 की धारा-142 के तहत नोटिस जारी किया गया है अब दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की बारी है।
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