- उपभोक्ता परिषद ने उठाया मुद्दा कहा 132 केवी सब स्टेशनों की कुल क्षमता केवल 4 करोड़ 30 लाख किलोवाट के बराबर, वहीं प्रदेश के विद्युत उपभोक्ता द्वारा लिया गया कुल स्वीकृत भार 6 करोड़ 76 लाख किलोवाट ऐसे में सिस्टम है मिसमैच पहले हो उसमें सुधार
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा: पहले 11,851 करोड़ को जनता को दिया जाये लाभ फिर होगा लाभ
लखनऊ,21 जून 2019: प्रदेश की बिजली कम्पनियां जहां वर्ष 2019-20 के लिये प्रदेश के गरीब ग्रामीण किसानों शहरी घरेलू की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी कराने के लिये लगी हैं वहीं आगामी 25 जून, 2019 को ट्रांसमिशन टैरिफ पर होनी वाली सार्वजनिक सुनवाई के क्रम में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयोग सचिव श्री संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर उपभोक्ता हित में अपनी आपत्तियां दाखिल करते हुये ट्रांसमिशन टैरिफ में प्रस्तावित वृद्धि को न स्वीकार करने और साथ ही ट्रांसमिशन हानियां केवल 3 प्रतिशत ही अनुमोदित करने की मांग उठाई।
गौरतलब है कि पावर ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा अपनी ट्रांसमिशन हानियां 3.56 प्रस्तावित की गयी जिस पर उपभोक्ता परिषद ने आपत्ती दर्ज कराते हुये कहा उड़ीसा में केवल 3 प्रतिशत है, छत्तीसगढ़ में 3.22 प्रतिशत है, महाराष्ट्र में 3.11 प्रतिशत है, आन्ध्रप्रदेश में 3.10 प्रतिशत है फिर उत्तर प्रदेश में अधिक क्यों?
वहीं दूसरी ओर आज बिजली दर में प्रस्तावित बढ़ोत्तरी पर खीचतान के बीच पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री आलोक कुमार पावर कार्पोरेशन एम0डी0 महोदया के साथ आयोग चेयरमैन श्री आर0पी0 सिंह से मिलने पहुंचे थे वहीं उपभोक्ता परिषद पूरे मामले पर नज़र बनाये हुये अपनी विधिक तैयारियों में जुटा है और एलान किया है जब तक उदय योजना के तहत मिलने वाले लाभ 11, 851 करोड़ के एवज में प्रदेश की जनता की दरों में कमी नहीं हो जाती उपभोक्ता परिषद चुप बैठने वाला नहीं है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कम्पनी जहां 5 पैसा प्रतियूनिट टैरिफ बढ़ाने की बात कर रही है वहीं उसे यह भी अध्ययन करना चाहिये कि वर्तमान में ट्रांसमिशन के 132 केवी सब स्टेशनों की क्षमता जो मात्र 47801 एमवीए है और बहुत कम है जिसके चलते चाहकर भी प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सुचारू रूप से 20 से 24 घंटे अनवरत बिजली नहीं आपूर्ति की जा सकती है क्योंकि इस क्षमता को यदि किलोवाट में बदला जाय कुल ट्रांसमिशन की जो क्षमता आयेगी वह लगभग 4 करोड़ 30 किलोवाट के बराबर होगी वहीं दूसरी ओर प्रदेश के 3 करोड़ विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा जो लिया गया कुल स्वीकृति भार है।
वह लगभग 6 करोड़ 76 लाख किलोवाट के बराबर है यानि कि ट्रांसमिशन क्षमता व उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये भार के बीच लगभग 2 करोड़ किलोवाट से ज्यादा का अन्तर है ऊपर से 20 प्रतिशत बिजली चारी का लोड भी इसी सिस्टम पर आता है यानि की वह भी लगभग 1 करोड़ किलोवाट के बराबर होगा ऐसे में गर्मी में पीक आवर्स में जब प्रदेश विद्युत उपभोक्ता अपने कुल भार के बराबर अपने उपकरण चलायेगा तो पूरा सिस्टम कांपने लगेगा केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा डायवर्सिटी फैक्टर 1 अनुपात 1 पीक आवर्स में माना जाता है ऐसे में प्रदेश के मिसमैच सिस्टम पर पहले ट्रांसमिशन कम्पनी उचित काम कर उसका सही करे तभी सही स्थिति में प्रदेश की जनता को अच्छी आपूर्ति मिल पायेगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा अभी ट्रांसमिशन डिस्ट्रीबूशन सभी स्तर पर बिजली कम्पनियों को बहुत काम करना है पहले वह उसमें सुधार करे फिर बिजली दर में बढ़ोत्तरी की बात करे।







