- आयोग द्वारा कानून बनने के बाद भी लेसा में विद्युत उपभोक्ताओं के उत्पीड़न पर बड़ा खुलासा
कानून का उल्लंघन कर लेसा के एक विद्युत उपभोक्ता को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-126 के तहत गलत फँसाकर किया गया उसका उत्पीड़न, उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष स्वयं पहुँचे उपभोक्ता के द्वार, और हुआ बड़ा खुलासा
लखनऊ, 14 फरवरी 2019: उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा मीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं के लिए जब यह कानून बनाया गया कि यदि कोई भी उपभोक्ता अपने परिसर के आंशिक भाग में मकान के विस्तार हेतु कोई भी निर्माण कार्य अपने द्वारा लिये गये स्वीकृत भार के अन्दर करा रहा है तो उसे अस्थायी (टेम्पोरेरी) कनेक्शन लेने की कोई आवश्यकता नहीं है, और यह कानून टैरिफ की धारा-14 में स्पष्ट रूप से प्राविधानित कर दिया, लेकिन कानून बनने के बाद भी पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं का उत्पीड़न होता रहा है।
इसी तरह का एक चौकाने वाला मामला तब सामने आया, जब राजधानी लखनऊ के एक बिजली उपभोक्ता श्री बृजेश मिश्रा, एफ-1440, राजाजीपुरम् की वृद्ध माता श्री मन्जू मिश्रा द्वारा उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को एक रजिस्टर्ड शिकायत भेजते हुए न्याय कराने की गुहार लगाई है। रजिस्टर्ड शिकायत में मन्जू मिश्रा द्वारा यह बताया गया कि दिनांक 12 फरवरी को राजाजीपुरम् के अवर अभियन्ता द्वारा उपभोक्ता के परिसर पर जाँच कर चेकिंग रिपोर्ट में उपभोक्ता के परिसर पर भवन निर्माण कार्य कराये जाने को लेकर विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-126 के तहत दण्डनीय अपराध की चेकिंग रिपोर्ट भर दी गयी, जिससे उपभोक्ता काफी परेशान है।
उपभोक्ता के परिसर पर चेकिंग के दौरान काफी विवाद भी हुआ और पुलिस भी बुलाई गयी। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि कानून बनने के बाद भी उपभोक्ता का उत्पीड़न करने के लिए कानून का उल्लंघन कर परिसर के आंशिक भाग में निर्माण कार्य के एवज में धारा-126 की कार्यवाही नियम विरूद्ध क्यों की गयी? उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने रजिस्टर्ड शिकायत मिलते ही इसे गम्भीरता से लेते हुए बिजली विभाग के सम्बन्धित अधिकारियों, मुख्य अभियन्ता सहित उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए जब सम्बन्धित अधिकारियों से बात की तो उनके द्वारा यह कहा गया कि उपभोक्ता पूरा मकान गिराकर बना रहा है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने उपभोक्ता परिषद को उपभोक्ता द्वारा भेजे गये न्याय की गुहार हेतु प्रार्थना-पत्र के आधार पर स्वयं उपभोक्ता परिसर पर जाकर पूरे मामले को देखना ज्यादा उचित समझा, क्योंकि उपभोक्ता ने स्वयं लिखा था कि वह अपने परिसर में कुछ भाग में पुर्ननिर्माण करा रहा है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष स्वयं राजाजीपुरम् उपभोक्ता परिसर पर जब पहुँचे और उपभोक्ता बृजेश मिश्रा के साथ जब परिसर को देखा तो परिसर में ऊपर-नीचे दो कमरे वर्तमान में मौजूद थे और दो कमरों का निर्माण मकान की जर्जर हालत के कारण उपभोक्ता करा रहा था और उपभोक्ता का मीटर भी लगा था और वह उसके आधार पर बिल भी दे रहा था और उपभोक्ता ने बताया कि उसका भार कभी उसके द्वारा लिए गये स्वीकृत भार 2 किलोवाट के ऊपर नहीं गया इसके बावजूद भी उसे फँसाया गया। उपभोक्ता ने कहा कि मेरे द्वारा आयोग द्वारा जारी कानून के सम्बन्ध में समाचार पत्रों में छपी खबर को भी दिखाया गया, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को उपभोक्ता द्वारा बताई गयी सभी बातें सही साबित हुयी और यह सिद्ध हो गया था कि उपभोक्ता को फँसाया गया।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष स्वयं उपभोक्ता को लेकर राजाजीपुरम् अधिशासी अभियन्ता श्री एके सिंह के पास पहुँचे और उन्हें आयोग द्वारा जारी कानून टैरिफ की आंशिक प्रति उन्हें सौंपते हुए कहा कि जब टैरिफ की धारा-14 में स्पष्ट प्राविधान है फिर उपभोक्ता का उत्पीड़न करने के लिए गलत चेकिंग रिपोर्ट क्यों भरी गयी? उस पर अधिशासी अभियन्ता श्री एके सिंह द्वारा उपभोक्ता के सामने यह स्वीकार किया कि चेकिंग रिपोर्ट के आधार पर उपभोक्ता के खिलाफ कोई भी अपराध नहीं बनता और न ही उपभोक्ता के खिलाफ कोई भी असेसमेंट की कार्यवाही आगे की जाएगी।







