अमेरिका में भारतीयों और पाकिस्तानियों की साझी ईद का संगम
नई दिल्ली, 16 जून। अमेरिका में ‘फेसबुक लाइव’ ट्रेडिशन ट्रेंडिंग पर है इस बार वहां के लोगों ने ईद फेस्टिवल को मोबाइल पर फेसबुक लाइव किया जो अपने आप में इस आपसी भाईचारे ‘प्रेम और सौहार्द’ की मिसाल है और मकसद इन पलों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करना एक मीडिया के अनुसार पता चला है कि इस शुक्रवार को क़रीब 30 लाख अमेरिकी मुसलमानों ने ईद का त्योहार मनाया। लोगो को गैजेट्स में इन नई मस्ज़िदों को फेसबुक लाइव देखना एक नया सुखद अनुभव का अहसास कराता है। ईद के दिन फ़ेसबुक पर लॉग-इन करके लोगों ने वॉशिंगटन समेत कई अन्य बड़ी मस्जिदों का लाइव प्रसारण देखा।
लोगों का ऐसा कहना है कि इस त्योहार में आकर्षण होती है ‘चाँद रात’ इसके अलावा ईद के दिन रात में घूमने फिरने का भी अलग ही मज़ा होता है। इस मौक़े पर वॉशिंगटन में रह रहे ज़्यादातर एशियाई मूल के लोग वर्जीनिया जाना पसंद करते हैं। लोगों का ऐसा कहना है कि ईद के दिन जश्न मनाने के लिए अमरीका में वर्जीनिया से बेहतर जगह और कोई नहीं है। यहाँ के एक नामी एक्सपो सेंटर में ईद के अवसर पर चाँद रात मेला सजा है। मेले में खाने-पीने के अलावा शॉपिंग के तमाम विकल्प मौजूद हैं। सबसे ज़्यादा जो चीज़ लोगों को यहाँ पसंद आ रही है, वो है देसी खाना. लज़ीज़ एशियाई ज़ायक़े चखने वालों की यहाँ भीड़ जमा है।

55 साल की हुमा पाकिस्तान के कराची शहर से हैं। वो सात साल पहले ही अमरीका में आकर बसी हैं। इस मेले में हुमा घर से हलीम बनाकर लाई हैं। यहाँ उनका एक छोटा सा स्टॉल है और 10 अमरीकी डॉलर में वो एक प्लेट हलीम बेच रही हैं। खाने के स्टॉल पर हुमा का बेटा भी उनका हाथ बँटा रहा है। वो कहती हैं, “जब मैं कराची में थी, तो मैंने कभी घर से बाहर ये काम नहीं किया. लेकिन यहाँ काम करना आसान है। पिछले साल ईद के मेले में हमने दस हज़ार डॉलर से ज़्यादा का हलीम बेचा था”।
हालांकि मुझे लगा कि मेरे ‘कराची में काम करने वाले सवाल’ ने उन्हें थोड़ा शर्मिंदा किया। बहरहाल, अमरीका में रहने वाले अधिकांश दक्षिण एशियाई लोग गुज़रे ज़माने से उनके समाज से बनी हुईं वर्जनाओं और तमाम तरह की पाबंदियों से आज़ाद हो जाना चाहते हैं. वो नहीं चाहते कि वही रोकटोक बरकरार रहे।
वर्जीनिया के इस मेले में 90 प्रतिशत स्टॉल महिलाओं के हैं. ऐसे स्टॉल जिनका संचालन पुरुष कर रहे हों, कम ही हैं। क़रीब 20 साल पहले मुंबई से अमरीका आईं श्रुति मलिक भारी ड्रेसेज़ (शादी के कपड़े) तैयार करने में एक्सपर्ट हैं। उनके स्टॉल के ठीक सामने आयशा ख़ान का स्टॉल है, जो लाहौर से हैं. आयशा इस मेले में कश्मीरी कढ़ाई वाले कपड़े बेच रही हैं। भारत और पाकिस्तान के राजनीतिक हालात कैसे भी हों, श्रुति और आयशा की दोस्ती या सेहत पर उसका कोई फ़र्क नहीं पड़ता। दोनों की दोस्ती एक अपवाद है और उन्हें साथ देखकर एक सुखद आश्चर्य होता है।क्योंकि दोनों ही देशों के मीडिया में एक-दूसरे के लिए बेहद आक्रामक ढ़ंग से कड़वे शब्दों का इस्तेमाल होता है। उससे जो तस्वीर उभरती है वो नफ़रत से भरी होती है।







