संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेजी से दूर हो रही गरीबी?

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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट: देश में कितने गरीब

नई दिल्ली, 13 जुलाई 2019: संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2005-06 में भारत के करीब 64 करोड़ लोग (55.1 फीसद) गरीबी में थे जो संख्या घटकर 2015-16 में 36.9 करोड़ (27.9 फीसद) पर आ गई। इस प्रकार, भारत ने बहुआयामी यानी विभिन्न स्तरों और 10 मानकों में पिछड़े लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण एशिया में तेज प्रगति सबसे तेज प्रगति दक्षिण एशिया में देखी गई। भारत में वर्ष 2006 से 2016 के बीच 27.10 करोड़ लोग, जबकि बांग्लादेश में 2004 से 2014 के बीच 1.90 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। दस चुने गए देशों में भारत और कंबोडिया में एमपीआई मूल्य में सबसे तेजी से कमी आई।

इन्होंने सर्वाधिक गरीब लोग बाहर निकाले।झारखंड रहा सबसे आगेभारत में गरीबी में कमी के मामले में सर्वाधिक सुधार झारखंड में देखा गया। वहां विभिन्न स्तरों पर गरीबी 2005-06 में 74.9 फीसद से कम होकर 2015-16 में 46.5 फीसद पर रही। भारत ने पोषण, स्वच्छता, बच्चों की स्कूली शिक्षा, बिजली, स्कूल में उपस्थिति, आवास, भोजन ईंधन और संपत्ति के मामले में अहम सुधार किया।

आकंड़ों के मुताबिक भारत में 2006 से 2016 के बीच इस दलदल से बाहर हुए 27 करोड़ लोग

भारत में स्वास्य, स्कूली शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति से लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में भारी प्रगति हुई है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006 से 2016 के बीच रिकार्ड 27.10 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। इस दौरान खाना पकाने का ईंधन, साफ-सफाई और पोषण जैसे क्षेत्रों में मजबूत सुधार के साथ विभिन्न स्तरों पर यानी बहुआयामी गरीबी सूचकांक मूल्य में सबसे बड़ी गिरावट आई है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) व आक्सफोर्ड पोवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव (ओपीएचआई) द्वारा तैयार नियंतण्र बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) 2019 बृहस्पतिवार को जारी किया गया।

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