नई दिल्ली, 01 अप्रैल। ब्रह्मांड की जटिल गुत्थियों को सुलझाने, ब्लैक होल और सिंगुलैरीटी तथा सापेक्षता के सिद्धांत के क्षेत्र में अपने अनुसंधान से महान योगदान देने वाले भौतिकीविद और विश्च के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का अंतिम संस्कार कल शनिवार को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी कॉलेज के नजदीक एक चर्च में किया गया।
14 मार्च को हुई थी स्टीफन हॉकिंग की मौत
यह कॉलेज हॉकिंग का 50 से अधिक वर्षों तक अकादमिक घर रहा है। उनका अंतिम संस्कार बेहद निजी स्तर पर किया गया। विश्च के मशहूर वैज्ञानिकों और लेखकों में से एक हॉकिंग ने 14 मार्च को 76 वर्ष की उम्र में अपने कैंब्रिज स्थित घर में आखिरी सांस ली थी। हॉकिंग के बच्चों की इच्छा के अनुरूप गॉन्विल में यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट मेरी द ग्रेट और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कैयुस कॉलेज में उनकी अंतिम सेवा( फ्यूनरल सर्विस) बेहद निजी स्तर पर की गई। जिसमें परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों सहित लगभग 500 लोगों ने शिरकत की।
‘एम्योट्रॉपिक लेटरल स्लेरोसिसस’ नामक बीमारी के थे शिकार
विश्व के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिकों में से एक हॉकिंग ने अंतरिक्ष की उस खोज के लिए जरूरी गणित तैयार कर लिया था, जिसके जरिए“ कई ब्रह्मांडों’’ की मौजूदगी के प्रायोगिक सबूत खोजे जा सकते हैं। हॉकिंग का जन्म इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में आठ जनवरी, 1942 को हुआ। ठीक इसी दिन महान खगोलज्ञ गैलिलियो गैलीली की 330 वीं पुण्यतिथि थी। हॉकिंग को स्नायु संबंधी बीमारी (एम्योट्रॉपिक लेटरल स्लेरोसिसस) थी, जिसमें व्यक्ति कुछ ही वर्ष जीवित रह पाता है। उन्हें यह बीमारी 21 वर्ष की आयु में 1963 में हुई और शुरूआत में डॉक्टरों ने कहा कि वह कुछ ही वर्ष जीवित रह सकेंगे। जुझारू हॉकिंग अपनी बीमारी का पता लगने के बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने चले गये और अल्बर्ट आइंस्टिन के बाद वह दुनिया के सबसे महान भौतिकीविद बने।







