नई दिल्ली। विकाश बराला को एक लड़की के साथ छेड़छाड़ के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। चंडीगढ़ में मध्यरात्रि में आईएएस की बेटी के साथ, विकाश बराला और उसके कुछ दोस्तों पर पीछा करने का आरोप है। पीड़ित ने चंडीगढ़ पुलिस स्टेशन के आरोपी के खिलाफ मामला दायर किया। आपको बताएं कि विकाश बराला हरियाणा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का पुत्र है और बारला ने जिसके साथ छेड़छाड़ की थी वह लड़की आईएएस की बेटी है। पुलिस ने विकास बरला को जमानत दे दी है।
यह बताया गया है कि विक्ल बरला को जेल से हटा दिया गया है और साथ ही उन आरोपी को भी शामिल किया गया है जो उनके साथ शामिल थे। हरियाणा पुलिस ने आईपीसी की धारा 355 डी (अनुपालन) और विकास और उसके दोस्त के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत प्राथमिकी दायर की, जिसके बाद पुलिस ने तीन आईपीएस और 511, 341 और 365 डालर दर्ज कराए।
लड़की ने अपने बयान में कहा कि मैं अपनी कार से सेक्टर -8 मार्केट से रात 11:45 बजे घर जा रही था। जब मैं सड़क पार कर गई और सेक्टर -7 के पेट्रोल पंप पर पहुंच गई। उस समय मैं फोन पर अपने मित्र से बात कर रहा थी। अचानक मुझे एहसास हुआ कि एक सफेद फोर्ड फोर्ड कार मेरी कार का पीछा कर रही है उस टैक्स में दो लड़के थे मैंने सोचा कि वह मेरी कार को टक्कर मार देगा, लेकिन किसी तरह मैं खुद को बचा रही था।
मैंने पुलिस को बताया और उन्होंने मुझसे लोकेशन बताने के लिए कहा यह भी कहा कि वह जल्द ही पहुंचेंगे। दो लड़के मुझे पकड़ने के लिए अपना प्रयास कर रहे थे। कुछ ही समय बाद हे मुझे पुलिस दिखाई दी और इस तरह मुझे पुलिस ने बचा लिया।
अपने साथ घटित इस भयानक घटना का जिक्क्र सीनियर आईएस अधिकारी वीरेंद्र कुंडु की बेटी और डीजे वर्णिका कुंडु ने अपनी फेसबुक वॉल पर भी पोस्ट की है हिंदी अनुवाद दैनिक भास्कर से साभार है –
चंडीगढ़ पुलिस को शुक्रिया जिसने मेरे कॉल पर फौरी एक्शन लिया. उन्होंने सिस्टम में मेरे भरोसे को फिर से जिंदा कर दिया है.
एसयूवी में दो लड़के आधी रात को एक अकेली लड़की को छेड़कर मजा ले रहे थे. ये लोग इस तरह से मेरा पीछा कर रहे थे कि कई बार मुझे लगा कि ये मेरी कार को ठोंक देंगे. तब तक मैं अलर्ट हो चुकी थी इसलिए मैंने सेंट जॉन्स से राइट टर्न लेकर मध्य मार्ग लेने का प्लान किया जो थोड़ा बिजी और सेफ माना जाता है.
लेकिन राइट टर्न लेने वक्त एसयूवी ने रास्ता रोक दिया जिससे मुझे सीधे सेक्टर 26 की सड़क लेनी पड़ी. मैंने अगले टर्न पर फिर राइट लेने की कोशिश की लेकिन इस बार तो उन लोगों ने सीधे मेरी कार के सामने अपनी गाड़ी लगाई और पैसेंजर सीट पर बैठा लड़का उतरकर मेरी तरफ बढ़ने लगा.
मैंने तुंरत बैक गियर लगाई और इससे पहले कि वो फिर मेरे पास आते, तेजी से अगला राइट टर्न लिया. इस दौरान मैंने 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को अपनी हालत और लोकेशन बताई. फोन पर पुलिस ने कहा कि वो जल्दी पहुंच रहे हैं. मैं अब मेन रोड पर पहुंच चुकी थी और 15 सेकेंड से एसयूवी नहीं दिखी तो मुझे लगा कि फोन करता देख वो भाग गए होंगे लेकिन मैं गलत थी.
मध्य मार्ग पर मैं आगे बढ़ रही थी. इस सड़क पर 5-6 किलोमीटर तक एसयूवी मेरी कार के साथ-साथ चलती रही और हर 10-15 सेकेंड पर मेरी कार को रोकने की तरकीब लगाती रही. वो मेरी कार को बार-बार ब्लॉक करके रोकने की कोशिश कर रहे थे और मैं हर बार किसी तरह अपनी कार को निकालकर आगे बढ़ रही थी.
मेरे हाथ कांप रहे थे, कमर जकड़ रहा था, कुछ हक्की-बक्की और कुछ आंखों में आंसू लिए मैं ये सोच रही थी कि पता नहीं आज घर लौट पाऊंगी भी कि नहीं. पता नहीं कब पुलिस वाले आएंगे या आएंगे भी या नहीं.
इन लड़कों ने 6 किलोमीटर तक लगातार मेरा पीछा किया और इस रोड के आखिर में ट्रैफिक लाइट के पास मेरी कार का रास्ता रोक दिया. मुझे भागने या कार निकालने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा. पैसेंजर सीट से फिर एक लड़का उतरकर मेरी तरफ बढ़ा. पता नहीं कैसे लेकिन मैंने कार को रिवर्स गियर में डाला और राइट की तरफ दिखी थोड़ी सी जगह से लगातार हॉर्न बजाती कार निकाली ताकि वहां गुजर रही दूसरी गाड़ियां मेरी हॉर्न सुनकर देखें कि दिक्कत क्या है कि ये लगातार हॉर्न बजा रही है.
तब तक वो लड़का मेरी कार के पास पास आ चुका था. उसने मेरे कार के विंडो पर जोर से हाथ मारा और गेट खोलने की कोशिश की. तभी मेरी नजर एक पुलिस कार पर पड़ी. मैं लगातार हॉर्न बजा रही थी. कुछ पुलिस वाले दौड़कर आए और एसयूवी वालों को पकड़ा.
डर से कांपती मैं सीधे घर गई और अपने पिता वीरेंद्र कुंडु को सब कुछ बताया और फिर उनके साथ एफआईआर करने वापस गई. दोनों लड़के गिरफ्तार हो चुके थे जो निश्चित रूप से प्रभावशाली परिवार से हैं और राजनीतिक कनेक्शन रखते हैं.
चंडीगढ़ पुलिस को शुक्रिया क्योंकि अगर उनके जवान समय पर नहीं आते तो शायद आज मैं ये स्टेट्स नहीं लिख पाती. अगर देश के सबसे सेफ शहर में एक लड़की के साथ ऐसा हो रहा है तो हम कहां जा रहे हैं.
मैं चकित हूं कि जिस शहर में हर रेडलाइट पर कैमरा लगा है और हर 200 मीटर पर पुलिस वाले हैं वहां इन लड़कों ने कैसे सोच लिया कि ये मेरी कार में घुस सकते हैं या मुझे अपनी कार में खींच सकते हैं. सिर्फ इसलिए कि वो एक ताकतवर परिवार से हैं.
ऐसा लगता है कि मैं एक आम आदमी की बेटी ना होने की वजह से खुशकिस्मत हूं नहीं तो इन वीआईपी लोगों के खिलाफ खड़ा होने की उनके पास क्या ताकत होती है. मैं इसलिए भी खुशकिस्मत हूं क्योंकि मैं रेप के बाद किसी नाले में मरी नहीं पड़ी हूं. अगर ये चंडीगढ़ में हो सकता है तो कहीं भी हो सकता है.
लेडीज, अपनी सुरक्षा के लिए खुद सतर्क रहें. कोई गाड़ी अगर आपको तंग कर रहा है तो उसकी गाड़ी का नंबर नोट करिए. जैसे ही कोई पीछा करना शुरू करे तुरंत पुलिस को फोन करिए. अपने मां-बाप को फोन करिए और उनको बताइए कि आप कहां हैं और किस हालत में हैं. सुरक्षित तरीके से जैसे भी भाग सकती हैं, भागने की कोशिश करिए.
आपकी जान सबसे बड़ी चीज है. अगर वो आपके पास आता है तो जो भी चीज मिले उसे हथियार बनाकर खुद को बचाइए. पिछली रात तक मैं किसी भी हथियार की फैन नहीं थी, चाहे वो बंदूक हो, डंडा हो, गोल्फ स्टिक हो या चाकू. लेकिन ये आपको ज्यादा सेफ और आत्मविश्वास से भरे होने का अहसास कराएंगे.






