इधर कुछ वर्षों से पूरे देश के मौसम में हुए परिवर्तनों से खेती किसानी करने वाले लोगों के खेतों में पैदा होने वाले या खेतों में खड़ी फसलों पर वर्षा, आंधी पानी -ओले कहर ढाती चली जा रही है। मौसम में हुये आमूलचूल परिवर्तनों से जहाँ देश के कुछ किसान विल्कुल बर्बाद हो गये हैं वहीँ खाद्यान्नों के दामो में बेताहाश बृद्धि हो जाने देश के लोगों को पहले की अपेक्षा अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ खाद्यान्नों के बढे दामो का फायदा किसानो को नहीं मिल पाता है।

यह सिलसिला कमोवेश हमारे देश में एक लंम्बे समय से चली आ रहा है इसका एक प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग भी है। जिसका सीधा असर किसानों की फसलों पर भी पड़ा है इसलिए हमारे देश के किसान गरीब और गरीब होते चले गये जिसकी वजह से उनके माली हालत ठीक नही होने से हमेशा अपना जीवन गरीबी में ही गुजरने के लिये मजबूर हैं।

इन दिनों देश के कुछ हिस्से विशेष कर उत्तर प्रदेश में किसान अपने खेतों में लगी फसलों की कटाई-मड़ाई में लगे हुये हैं ऐसी अवस्था में देश के मौसम विभाग ने सोमवार 21 अप्रैल व मंगलवार 22 अप्रैल तारीखों के मध्य मौसम खराब होने की चेतावन देते हुये कहा है कि इन दिनों विशेष कर उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों में धूल भरी आंधी चलने के साथ ही बूंदाबंदी होने की भी संभावना व्यक्त की थी। जहाँ बूंदाबांदी की बात है तो यदि उत्तर प्रदेश में इस समय बारिश होने का मतलब है फिर एक बार गेहूं से लेकर दलहनी एवं तिलहनी जैसी फसलों का बर्बाद होने से इसका प्रभाव किसानों से लेकर देश की आम जनता पर पड़ना तय सी बात है।
- प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती







