सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है, तीज का व्रत करने से स्त्रियों को सुहाग और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हर साल सभी बड़े चाव से तीज मनाते हैं लेकिन तीज क्यों मनाई जाती है। इसके बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी होगी।
हरियाली तीज
हरियाली तीज के दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया, साथ ही देवी पार्वती के कहने पर शिव जी ने आशीर्वाद दिया कि जो भी कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी और शिव-पार्वती की पूजा करेगी उनके विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होंगी साथ ही योग्य वर की प्राप्ति होगी। इसी कारण कुंवारी लड़कियां मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखकर माता पार्वती की पूजा करती हैं।

सुहागन स्त्रियों को इस व्रत से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और लंबे समय तक पति के साथ वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त करती हैं।

हरियाली तीज के दिन सुहागन स्त्रियां हरे रंग का ऋृंगार करती हैं। इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ ही वैज्ञानकि कारण भी शामिल है। मेंहदी सुहाग का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। इसलिए महिलाएं सुहाग पर्व में मेंहदी जरूर लगाती हैं। इसकी शीतल तासीर प्रेम और उमंग को संतुलन प्रदान करने का भी काम करती है। ऐसा माना जाता है कि सावन में काम की भावना बढ़ जाती है, मेंहदी इस भावना को नियंत्रित करती है। हरियाली तीज का नियम है कि क्रोध को मन में नहीं आने दें। मेंहदी का औषधीय गुण इसमें महिलाओं की मदद करता है।







