पारंपरिक क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने पर देगा जोर, स्व वित्त पोषित होंगे पाठ्यक्रम
लखनऊ, 28 मई 2020:`लखनऊ विश्वविद्यालय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के पारंपरिक क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने का लगातार प्रयास कर रहा है। पहले विश्वविद्यालय के छात्रावासों में योग की क्रिया सिखायी गयी और अब इसके अध्ययन और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए योग और वैकल्पिक चिकित्सा संकाय शुरू करने जा रहा है। गुरुवार को की गयी घोषणा के अनुसार विश्वविद्यालय संकाय के दो घटक विभागों में स्व वित्तपोषित पाठ्यक्रम चलाएगा और स्नातक, स्नातकोत्तर, पीजी डिप्लोमा, एकीकृत पांच साल का कार्यक्रम और पीएचडी कार्यक्रम चलाएगा।
योग विभाग में स्नातक कार्यक्रम में 60 सीटें होंगी। स्नातकोत्तर और डिप्लोमा में क्रमशः 50 और 40 सीटें होंगी। प्राकृतिक चिकित्सा विभाग में बीइनवाईएस (बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज) की स्नातक डिग्री में 60 सीटें होंगी और पीजी डिप्लोमा में 40 सीटें रखी गयी हैं। विश्वविद्यालय में वर्तमान चल रहे मानव चेतना और योग संस्थान को नए संकाय के साथ मिला दिया जाएगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स एंड इंफेक्शियस डिजीज (आईएएमजीआईडी) नामक एक अंतःविषयी अनुसंधान, शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थान भी शुरू कर रहा है। संस्थान का आणविक स्तर पर डीएनए विश्लेषण, आरएनए विश्लेषण आदि जैसे विषयों में शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के तीन प्रमुख लक्ष्य होंगे।
इसके साथ ही संक्रामक रोगों के आणविक जीव विज्ञान को समझना और उनसे सम्बन्धी तकनीकों जैसे रियल टाइम पीसीआर (पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन), इलेक्ट्रोफोरोसिस, एचपीएलसी (हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी), मास स्पेक्ट्रोमेट्री, आदि में विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करना भी इसके लक्ष्यों में सम्मिलित होगा।
संस्थान आनुवांशिकी और संक्रामक रोगों के क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशाला, सेमिनार, प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम आदि भी प्रदान करेगा। आईएएमजीआईडी जागरूकता अभियान और सामुदायिक आउटरीच गतिविधियों की पेशकश भी करेगा।







