Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 606 तुम आगे निकल आए हो या मैं चला गया हूं पीछे कुछ भी हुआ हो लेकिन अब हम मिलना चाहते हुए भी नहीं मिलते गर्व से या ग्लानि से कभी रहा था हमारा गहरा साथ, यह सोचते बस! हम दूर से हिलाते हैं हाथ. आनंद अभिषेक
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन