नई दिल्ली 12 फरवरी-2018। विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को अब नीट की परीक्षा पास करनी होगी। सरकार उनके लिए यह परीक्षा अनिवार्य करने की योजना बना रही है, ताकि सिर्फ सक्षम छात्र ही विदेशी विश्वविद्यालयों में दाखिला लें। वर्तमान में देश के सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने के इच्छुक छात्रों को ही ष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पास करनी होती है। यह परीक्षा वर्ष-2016 में अस्तित्व में आई थी। लेकिन अब विदेशों में पढ़ने के इच्छुक छात्रों को भी यह परीक्षा पास करनी होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है। उन्होंने बताया कि फिलहाल जो विद्यार्थी चिकित्सा की पढ़ाई करने के लिए विदेश जाते हैं, उनमें करीब 12 से 15 प्रतिशत स्नातक ही फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एक्जामिनेशन (एफएमजीई) की परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाते हैं। इस परीक्षा का आयोजन भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) करती है।
उन्होंने बताया, विदेश से पढ़ाई कर लौटने वाले छात्रों में से मुश्किल से 12 से 15 प्रतिशत स्नातक ही फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एक्जामिनेशन (एफएमजीई) की परीक्षा पास कर पाते हैं। अगर वे एफएमजीई की परीक्षा पास नहीं करते हैं तो भारत में डॉक्टरी के लिए पंजीकृत नहीं होते पाते। तब वे गैर कानूनी रूप से डॉक्टरी करने लगते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। इसीलिए नीट को जरुरी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिर्फ सक्षम छात्र ही विदेशों में पढ़ाई के लिए जाएं। वर्तमान में मेडिकल पाठ्यक्रम का अध्ययन करने के इच्छुक छात्रों को भारत के बाहर किसी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए एमसीआई से आवश्यक सर्टिफिकेट लेना होता है। बता दें कि हर साल करीब सात हजार छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। उनमें से अधिकतर चीन और रूस जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि नए प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद भारत से बाहर जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक उन्हीं छात्रों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दिया जाएगा, जिन्होंने नीट की परीक्षा पास की हो। ऐसी शिकायत थी कि एफएमजीई के प्रश्नपत्र बेहद कठिन होते हैं और इसके चलते विदेश से आए छात्र इसमें उत्तीर्ण नहीं हो पाते। लेकिन एफएमजीई पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए बनी समिति ने इसे बिलकुल उपयुक्त एवं प्रासंगिक पाया।
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