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    Home»ज़रा हटके

    विवाह की इन रस्मों के पीछे धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारण भी होते हैं

    ShagunBy ShagunJuly 1, 2017 ज़रा हटके No Comments4 Mins Read
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    हिन्दू धर्म शादी-विवाह को जन्म जन्मांतर का बंधन मना जाता है। हिन्दू धर्म में शादी-विवाह में अनेक रस्में निभाई जाती हैं आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि विवाह की इन रस्मों के पीछे सिर्फ धार्मिक कारण ही नहीं है बल्कि इन रस्मों के पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपा होता है।

    दुनिया भर की शादियों में भारतीय शादी की अपनी अलग चमक-धमक होने के कारण और रीति-रिवाजों के कारण यह बहुत चर्चित है। हमारे यहां शादी जैसे पवित्र बंधन में जब किसी जुगल-जोड़े को बांधते हैं तो उनके आने वाले जीवन में खुशिया आयें उनका भावी जीवन सुखद हो उनके शुभ के लिए बहुत से रीति-रिवाजों और परम्पराओं को निभाया जाता है। इन रस्मों में पूरी तरह से हमें कहीं न कहीं वैज्ञानिक कारण जरूर मिल जाएगा।

    हल्दी वाली रस्म—

    शादी में हमारे यहां हल्दी की रस्म को काफी मुख्य माना जाता है। इस रस्म में दूल्हा-दुल्हन के शरीर पर घर पे बने हल्दी के लेप को लगाया जाता है इस हल्दी के लेप में हम तेल और गुलाब जल के साथ और भी कुछ चीजें मिलाते हैं जिससे त्वचा की नमी बनी रहे। हल्दी के लेप से त्वचा की रंगत में निखार आता है। हल्दी के औषधीय गुण शरीर और त्वचा दोनों के लिए बेहद लाभदायक होते हैं। यह त्वचा में होने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करता है। हल्दी लगाने से त्वचा का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और त्वचा में प्राकृतिक रूप से निखार आता है।

    मेहंदी वाली रस्म––

    वैसे तो दुल्हन के हाथों पर रची मेहंदी कितनी गाढ़ी रची है इसे देखकर लोग बेशक ये अनुमान लगाते हैं कि उसकी शादीशुदा जिंदगी कितनी प्यार भरी होने वाली है। बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि मेहंदी लगाने की मुख्य वजह साजन का प्यार नहीं बल्कि मेहंदी के औषधीय गुण होते हैं। मेहंदी की खुशबू और उसमे होने वाली ठंडक शादी के दौरान होने वाले स्ट्रेस को कम करती है। यहीं कारण है कि शादी के दौरान मेहंदी की रस्म को बहुत महत्त्व दिया जाता है।

    मांग में सिंदूर वाली रस्म—

    शादी की सबसे महत्त्वपूर्ण रस्म जो होती है वो जब दूल्हा दुल्हन को सिंदूर लगता है वो होती है। सिंदूर सिर्फ आपके शादीशुदा होने का स्टेटस नहीं बताता बल्कि ये महिलाओं को हैल्दी व ठंडा रखने में भी मदद करता है। शादी के वक्त जब दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर डालता है, तब सिंदूर में होने वाली मरकरी दुल्हन के दिमाग को शीतलता पहुंचाती है। सिंदूर में हल्दी, नींबू के साथ बहुत थोड़ी मात्रा में मरकरी भी डाला जाता है। वैज्ञानिको के मुताबिक मरकरी की वजह से ही महिलाओं में सेक्स की इच्छा भी बनी रहती है। यही कारण है कि कुंवारी लड़कियों को सिंदूर लगाने की अनुमति नहीं है।

    बिछिया और कंगन वाली रस्म—

    शादी के बाद दुल्हन की पहचान उसके हाथ के कंगन की खनक और पैरों में बिछिया की चमक से भी होती है। शादीशुदा होने के बाद बिछिया पहनना बहुत जरूरी माना जाता है। भारतीय रिवाजों के अनुसार जेवर पहनना तो शुभ माना ही जाता है साथ ही इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी होता है। इनके आगे-पीछे होने से फ्रिक्शन पैदा होता है और हाथ का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। कंगन और चूड़ियाँ से हाथ का एक्यूप्रेशर पॉइंट्स भी प्रेस होता है।

    बिछिया चांदी से बनी रिंग है जिसे पैर की उंगली में पहना जाता है और चांदी एक गुण कंडक्टर धातु है जिसकी वजह से यह पृथ्वी से ध्रुवीय ऊर्जा खींचकर हमारे शरीर में पहुंचाती है। पैर की दूसरी ऊंगली की नर्व (नस) गर्भाशय से जुड़ी होती हैं। बिछिया पहनने से ये नर्व ज्यादा एक्टिव रहती है जिससे गर्भाशय हेल्दी रहता है व मासिक चक्र नियमित रहता है। मांग में सिंदूर पड़ने के बाद से शादीशुदा महिलाएं पैर में बिछिया जरूर पहनती हैं।

    पैरों में आलता वाली रस्म––

    वैसे तो आलता वाली रस्म शादी में महत्त्वपूर्ण होती ही है लेकिन कुछ राज्यों में इसका अलग ही महत्व होता है। बंगाल, ओडि़सा, बिहार जैसे राज्यों में दुल्हन के पैर में आलता लगाने (कहीं-कहीं दूल्हे के पैर में भी) से जुड़ी रस्म होती महत्त्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आलता से तनाव में कमी आती है। प्रकर्तिक तौर पीआर आलता का निर्माण पान के पत्ते या लाक से होता है। वैसे बाजार में आजकल सिंथेटिक आलता भी मिलने लगा है।

    अग्नि का महत्त्व—

    शादी में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेने को अहम माना जाता है वैसे तो अलग-अलग परिवार में शादी की कई तरह की रस्में होती हैं लेकिन अग्नि को साक्षी मानना लगभग सभी शादियों में होता है। दरअसल इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी होता है अग्नि वातावरण को शुद्ध करने के लिए जरूरी है। इससे नकारात्मकऊर्जा नष्ट होती है और सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। हवन के दौरान अग्नि में डाली जाने वाली लकड़ी, चावल, घी आदि से उठने वाला धुआं घर के कीटाणुओं को नष्ट करता है और वातावरण को शुद्ध करता है।

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