निर्णय पर सवाल उठने लगे हैं दबे स्वर में इसे ‘डील’ नाम दिया जा रहा है
माकन ने ट्वीट किया : कांग्रेस छोड़ते समय सुशील गुप्ता ने कहा था कि राज्यसभा के लिए ऑफर है, इसलिए कांग्रेस छोड़ रहा हूं
नई दिल्ली, 04 जनवरी। आप पार्टी ने आखिर राज्यसभा के लिए तीन नामों की घोषणा कर वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास के साथ केजरीवाल के विश्वस्त आशुतोष को भी किनारे लगा दिया। पार्टी ने दो बाहरियों समेत तीन नामों की घोषणा की है। इनमें एक सुशील गुप्ता कल तक कांग्रेस में रहे हैं और आप पर भ्रष्टाचार के जमकर आरोप लगा चुके हैं। इसके बाद आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पहली बार विरोधियों के साथ अपनों के भी निशाने पर आ गए हैं।
उनके निर्णय पर सवाल उठने लगे हैं। दबे स्वर में इसे ‘डील’ नाम दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर पार्टी में घमासान तय है। कहने को इन नामों को आप की पीएसी ने मंजूरी दी, लेकिन साफ है कि इसमें केजरीवाल की ही चली है। धुर विरोधी ही नहीं, बल्कि उनकी ईमानदारी की कसमें खाने वाले भी अब विरोधी सुर निकाल रहे हैं। केजरीवाल पर इस प्रकार खुलेआम आरोप लगना पार्टी के लिए खतरनाक माना जा रहा है। सबसे ज्यादा विरोध सुशील गुप्ता के नाम पर है। कुछ समय तक कांग्रेस में रहे सुशील गुप्ता ने करीब 40 दिन पहले कांग्रेस से त्यागपत्र देने के लिए संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया था।
उन्होंने दावा किया था कि वे राजनीति में रहते हुए समाज सेवा नहीं कर पा रहे। वे परिवार के कर्तव्यों से मुक्त हो चुके हैं और अब शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। इसी दौरान बात उठी थी कि कांग्रेस के राज्यसभा भेजने से मना करने पर वे पार्टी छोड़ रहे हैं। वे इसके लिए 50 करोड़ रुपये तक देने को तैयार थे। अब उनके अचानक आप में जाने और राज्यसभा के लिए नामांकन से तब की बात ताजा हो गई है। रही- सही कसर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने पूरी कर दी। माकन ने ट्वीट किया कि कांग्रेस छोड़ते समय सुशील गुप्ता ने कहा था कि राज्यसभा के लिए ऑफर है, इसलिए कांग्रेस छोड़ रहा हूं।
क्यों उठे सवाल ?
कांग्रेस में रहते ही उनकी कहीं ‘डील’ हो गई थी। कभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे योगेंद्र यादव ने भी सवाल व व्यंग्य करते हुए कहा कि पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था तो मैने कहा था कि उन्हें कोई खरीद नहीं सकता। गुप्ता को प्रत्याशी बनाने पर मैं क्या कहूं? हैरान हूं, स्तब्ध हूं और शर्मसार भी। यानी यादव भी ‘डील’ का इशारा कर रहे हैं। आप के शुभचिंतक राजनीतिक विश्लेषक अभय दुबे भी हैरान हैं।
उनका कहना है कि आखिर आपकी राजनीति की यह कैसी परिभाषा शुरू हो गई। 150 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक को प्रत्याशी बनाकर गरीबों की पार्टी क्या संदेश देना चाहती है। इनकी उम्मीदवारी से लोकतंत्र कैसे समृद्ध होगा? यह नापाक गठजोड़ है। वैसे जानकारी के अनुसार, पीएसी की मीटिंग में भी इन नामों पर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन केजरीवाल के कारण चुप्पी साध ली गई। अल्पसंख्यक कोटे से किसी को टिकट न देना भी पार्टी को भारी पड़ सकता है।







