लखनऊ, 4 सितंबर 2025: बलरामपुर गार्डन, अशोक मार्ग पर आज शाम 22वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले का भव्य उद्घाटन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने किया। ‘विजन 2047: विकसित भारत, विकसित प्रदेश’ थीम पर आधारित यह मेला 14 सितंबर तक चलेगा और साहित्य, संस्कृति, और ज्ञान के उत्सव का केंद्र रहेगा।
राज्यपाल ने मेले के स्टालों का गहनता से अवलोकन किया और रामायण, महाभारत, विवेकानंद और शिकागो जैसी पुस्तकों को खरीदा। इस दौरान अहमदाबाद के प्रकाशक अपूर्व शाह ने उन्हें ‘मां अहिल्याबाई’, ‘नर से नारायण’, ‘तत्वमसि’ सहित नौ पुस्तकों का सेट और एक इंची गीता गुटका भेंट किया।
मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने स्वागत भाषण में राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री और राम नाइक के पिछले मेलों में योगदान को याद किया। सह-संयोजक आस्था ढल, आकर्षण जैन, मेला निदेशक आकर्ष चंदेल, टीपी हवेलिया, और ज्योति किरन रतन सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।मेले की विशेषताएंसमय और प्रवेश: मेला रोजाना सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक मुफ्त प्रवेश के साथ खुला रहेगा।
प्रकाशक और स्टाल: दिल्ली के वाणी प्रकाशन, भारतीय ज्ञानपीठ, राजकमल, प्रभात, सस्ता साहित्य मंडल, प्रकाशन विभाग, गौतम बुक, और लखनऊ के ठाकुर पब्लिकेशन, श्रीरामकृष्ण मठ, नवपल्लव, बोधरस प्रकाशन, हिंदी वांग्मय निधि, ओशो फाउंडेशन के साथ अहमदाबाद, रायपुर, आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर, नोएडा, गुरुग्राम और भागलपुर के प्रमुख प्रकाशकों के स्टाल शामिल हैं।
पुस्तकों की विविधता: हिंदी और अंग्रेजी में नई और आकर्षक पुस्तकों का संग्रह, हर खरीद पर न्यूनतम 10% छूट।
सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन: कवि सम्मेलन, मुशायरा, पुस्तक विमोचन, बच्चों के लिए कहानी सत्र और प्रतियोगिताएं। उद्घाटन के बाद ओशो फाउंडेशन और डॉ. शशि चक्रवर्ती के नेतृत्व में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
मेले का महत्व
यह मेला न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक मंच है, बल्कि बच्चों, युवाओं और सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए ज्ञान और रचनात्मकता का उत्सव है। मेला संयोजक ने बताया कि यह आयोजन स्थानीय और राष्ट्रीय प्रकाशकों को एक मंच पर लाता है, जिससे पाठकों को विविध और गुणवत्तापूर्ण साहित्य उपलब्ध होता है। लखनऊवासियों और साहित्य प्रेमियों के लिए यह मेला 10 दिनों तक ज्ञान, संस्कृति, और मनोरंजन का अनूठा संगम होगा।







