किसान-मजदूरों के बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे
लखनऊ/आजमगढ़। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठा रहे छात्रों को अब किसान संगठनों का भी समर्थन मिल गया है। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने साफ ऐलान किया है कि वे किसानों और मजदूरों के बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे। स्कूलों की सोशल ऑडिट कराई जाएगी और यह लड़ाई गांव-कस्बे तक ले जाई जाएगी।
‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ की मांग
संगठनों के महासचिव राजीव यादव और विरेंद्र यादव ने कहा कि जब देश में वन नेशन-वन इलेक्शन और एक टैक्स की बात हो रही है, तो समान शिक्षा व्यवस्था क्यों नहीं? संसद के शीतकालीन सत्र में वे कामन स्कूल सिस्टम लागू करने का बिल लाने की मांग करेंगे। आंदोलनकारियों को चाहे जो भी नाम दिया जाए, वे अपना हक लेकर ही मानेंगे।
बच्चे भी अब जवाबदेही मांग रहे
किसान नेताओं ने बताया कि बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती घोटालों के साथ अब स्कूलों की हालत सुधारने को लेकर भी बच्चे सड़कों पर हैं। अच्छी सड़क, पर्याप्त शिक्षक, मिड-डे मील में पौष्टिक भोजन और बुनियादी सुविधाओं की मांग जायज है। हुक्मरानों को संभल जाना चाहिए।
80 साल बाद भी प्राथमिक स्कूल बदहाल
आजादी के इतने साल बाद भी गांव के प्राथमिक स्कूलों में डेस्क-बेंच, पंखा, बिजली, शौचालय और साफ पानी जैसी न्यूनतम सुविधाएं नहीं हैं। अमीर बच्चों के एयर-कंडीशंड क्लासरूम के मुकाबले गरीब बच्चे टाट-पट्टी पर बैठने को मजबूर हैं। ऐसे में विकसित भारत का दावा खोखला लगता है।







