उपभोक्ता परिषद का नए साल का संकल्प: संवैधानिक तरीके से आयोग के खिलाफ भी खोलेगा मोर्चा
किसानों से अधिक वसूली, इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी में अधिक वसूली, नारमेटिव के आधार पर अधिक वसूली, रेगुलेटरी सरचार्ज सहित अन्य मुद्दो पर संघर्ष होगा तेज
लखनऊ 31 दिसम्बर। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर उपभोक्ता परिषद ने ऐलान किया है कि प्रदेश के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं जिनके साथ प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा नियम विरूद्ध असंवैधानिक तरीके से अनेकों मदों में करोड़ो अरबों अधिक वसूली की गई है। नये वर्ष 2018 में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को उसे वापस दिलाने के लिये अपने संघर्ष और लड़ाई को और तेज करेगा। उपभोक्ता परिषद नये साल में उपभोक्ताओं को राहत दिलाने वाली अपनी योजनाओं पर चरणबद्ध काम करने के लिये अपनी प्राथमिकता तय कर ली है।
चाहें वह इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी के मद में प्रदेश के लगभग 40 से 60 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं से बिजली कम्पनियों द्वारा 5 प्रतिशत की जगह 20 प्रतिशत वसूली की गई जिसके तहत उपभोक्ताओं को लगभग रूपया 955 करोड़ मय ब्याज सहित वापस दिलाने का मामला हो, अथवा अनमीटर्ड किसानों से 160 प्रति हार्स पावर के आधार पर नियमानुसार 5 हार्स पावर पर रूपया 834 की जगह रूपया 3097 का बिल फ्लएण्ट ग्रिड बिलिंग एजेन्सी द्वारा गलत तरीके से निर्गत करके किसानों से वसूल किये गये करोड़ों रूपये का मामला हो या फिर बिना मीटर उपभोक्ताओं पर नारमेटिव आधार पर मनमानी यूनिट दर्ज कर अधिक वसूली का मामला हो ज्यादा बिजली के नाम पर शहरी दर पर वसूली का मामला हो या फिर उदय स्कीम लागू होने के बाद रेगुलेटरी सरचार्ज वसूलने का मामला हो या फिर मानक को पूरा न करने के एवज में विद्युत उपभोक्ताओं को मुवाअजा दिये जाने का मामला हो सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर उपभोक्ता परिषद संवैधानिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखकर नये साल में प्रदेश के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी सौगात देने का काम करेगी।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से काफी लम्बे समय से प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅ अर्थ का अनर्थ लगाकर प्रदेश के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं का उत्पीड़न किया अब बिजली कम्पनियों की इस प्रकार की असंवैधानिक कार्यवाही को उपभोक्ता परिषद आगे नहीं बढ़ने देगा। विद्युत अधिनियम-2003 के प्राविधानों के अनुसार प्रदेश के नियामक आयोग को भी अब स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिये विवश किया जायेगा। अभी तक अनेकों मामलों में चाहे वह बिजली दर में व्यापक बढ़ोत्तरी का मामला हो, टोरेन्ट पावर के लगभग 420 करोड़ के रोल आउट प्लान को आयोग द्वारा मनमाने तरीके से अनुमोदित करने का मामला हो या फिर सोलर पावर की दरें अधिक तय करने का मामला हो या अन्य अनेकों मामले जिसमें उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा कहीं न कहीं उपभोक्ता हितो को नजरअन्दाज किया गया और दबाव में फसैला सुनाया गया। अब उपभोक्ता परिषद इस प्रकार की कार्यवाही बिलकुल नहीं होने देगा।
उपभोक्ता परिषद ने उप्र सरकार से भी यह माॅग की है कि सरकार सजग होकर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हितों में निर्णय लें और पावर कारपारेशन प्रबन्धन के बहकावे मे बिलकुल न आयें। पावर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा जिस प्रकार से सरकार को गुमराह कर प्रदेश के ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में लगभग 63 से 150 प्रतिशत की बृद्धि कराई उससे पूरे प्रदेश में ग्रामीण व किसानों का सरकार के खिलाफ व्यापक गुस्सा व्याप्त है ।






