देश के सर्वाधिक सरकारी बकायेदार राज्यों में उप्र का प्रथम स्थान
उप्र में सरकारी विभागों पर मार्च 2017 से सितम्बर 2017 यानि कि छः माह में बढ गया रू0 1470 करोड का बकाया
आम उपभोक्ताओं के मात्र हजारों के बकाये पर कटता है कनेक्शन फिर सरकारी लाखों/करोडों के बकायेदारों पर मेहरबानी क्यों?
लखनऊ,15 जनवरी। पूरे देश में बिजली कम्पनियों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार हेतु उदय अनुबन्ध के तहत बडे पैमाने पर कार्य योजना बनाकर कार्यवाही चल रही है लेकिन आज भी पूरे देश में सरकारी विभागों पर बिजली का बकाया काफी चिन्ता का विषय बना हुआ है। आम जन मानस पर छोटा सा हजारों का बकाया होने पर भी उसका कनेक्शन काट दिया जाता है लेकिन सरकारी विभागों पर करोडों बकाया होने के बावजूद भी उनके साथ हमदर्दी क्यों बरती जाती है? 12 जनवरी 2017 को उदय मानीटरिंग कमेटी की दसवीं बैठक में देश के उन 8 राज्यों जिनमें सरकारी विभागों पर सर्वातिधक बकाया है का जब आंकलन हुआ तो सभी के होश उड गये। उप्र के लिये सबसे चौकाने वाली बुरी खबर रही कि उप्र देश के 8 राज्यों में सरकारी विभागों पर सबसे ज्यादा बकाया वाला प्रदेश बन प्रथम स्थान पर पहुच गया। आप सभी देखी रहे हैं कि उप्र में बकाया वसूली, बिजली चोरी अभियान जोरों पर है लेकिन आंकडे जो निकल कर आ रहे हैं उससे यह सिद्ध होता है कि सरकारी विभाग बकाये के बावजूद भी ठण्डी हवा खा रहे हैं।
उपभोक्ता परिषद द्वारा आज देश के उन 8 राज्यों के बकाये पर जो खुलासा किया जा रहा है वह स्वतः सत्यता बयां कर देंगे। जबकि सरकारें चाहें तो बकायेदार विभागों के बजट में कटौती कर बिजली विभाग को शत-प्रतिशत बकाया अदा कर सकती हैं।
राज्य बकाया मार्च 2017 तक बकाया सितम्बर 2017 तक
उत्तर प्रदेश 8853 करोड 10323 करोड
महाराष्ट्रा 3364 करोड 4650 करोड
केरला 2609 करोड 4151 करोड
तेलंगाना 3562 करोड 3862 करोड
आॅंध्र प्रदेश 2805 करोड 3340 करोड
कर्नाटक 1879 करोड 2134 करोड
हरियाणा 924 करोड 1021 करोड
राजस्थान 655 करोड 879 करोड
कुल बकाया 29871 करोड 34523 करोड
उप्र राज्य विद्युत उपभेाक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जहाॅं देश के सभी राज्यों में सरकारी बकाया लगातार बढ रहा है वहीं उप्र के आंकडों पर नजर डालें तो उप्र में मार्च से सितम्बर के बीच छः माह में सरकारी विभागों पर कुल 1470 करोड बकाया बढा है जो यह सिद्ध करता है कि सरकारी विभाग बकाये के बावजूद भी अपने मनमाने तरीके से मस्त हैं और बिजली कम्पनियाॅं भी उन पर कार्यवाही की औपचारिकता निभा रही हैं वहीं दूसरी ओर आम जनमानस किसान ग्रामीण के हजारों बकाये पर भी उन का बिजली का कनेक्शन काट दिया जाता है। जो अपने आप में चिन्ता का विषय है और दोहरे मापदण्ड को दर्शाता है। अभी भी समय है कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन को सरकार के सामने बकाया वसूलने हेतु बजटरी प्राविधानों के माध्यम से सत-प्रतिशत बकाया वसूलने हेतु कार्यवाही करानी चाहिये।







