Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 551 इस पाले से वे गए, उस पाले में रेंग। सबके घर में है लगी, इक दूजे की सेंध।। इक दूजे की सेंध, दोपहर- सुबह हो शाम, घर का आयाराम, पता कब गयाराम हो, खुद पर नहीं यकीन, कौन अब किसे संभाले। उस पाले के लोग, भला कब हो इस पाले में।। सीएम त्रिपाठी
‘सेल्स’ अब सिर्फ बिजनेस नहीं, जीवन का जरूरी कौशल है! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की नितीन ढबू की किताब का विमोचन