Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 564 इस पाले से वे गए, उस पाले में रेंग। सबके घर में है लगी, इक दूजे की सेंध।। इक दूजे की सेंध, दोपहर- सुबह हो शाम, घर का आयाराम, पता कब गयाराम हो, खुद पर नहीं यकीन, कौन अब किसे संभाले। उस पाले के लोग, भला कब हो इस पाले में।। सीएम त्रिपाठी