नई दिल्ली,13 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे चेलमेश्वर ने गुरुवार को विभिन्न पीठों को मामले आवंटित करने पर दिशा-निर्देश तय किए जाने की पूर्व कानून मंत्री की अपील को सूचीबद्ध करने का आदेश देने में गुरुवार असमर्थता जताई है। उन्होंने कहा कि कोई लगातार मेरे खिलाफ अभियान चला रहा है जैसे मानो मुझे कुछ हासिल करना है। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर ने कहा कि मैं शांति भूषण की याचिका पर सुनवाई नहीं करना चाहूंगा, इसके कारण एकदम स्पष्ट हैं।
न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा कि वह नहीं चाहते कि अगले 24 घंटे में उनके आदेश को फिर से पलटा जाए। यह देश अपना रास्ता खुद तय करेगा, लेकिन मैं इस जनहित याचिका की सुनवाई नहीं कर सकता, इसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने यह टिप्पणी तब की जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के यह कहने पर कि उनके पिता शांति भूषण की जनहित याचिका सूचीबद्ध नहीं की गई। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर द्वारा इस मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार करने के बाद प्रशांत भूषण ने अपनी याचिका का उल्लेख प्रधान न्यायाधीश के समक्ष किया।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा एक जज और एक वरिष्ठ वकील को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए जाने संबंधी सिफारिशों की फाइल पर पर सरकार अप्रत्याशित रूप से चुप्पी साधे है। ऐसे में यदि इसका जवाब नहीं दिया गया तो सुप्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इस आशय का खत सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जोसेफ कुरियन ने बुधवार को चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा को लिखा है।







