कपिल सिब्बल ने सरकार तो रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर बोला हमला
नई दिल्ली । जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति को मंजूरी न मिलने पर विवाद बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिख साफ कहा है कि जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति सही नहीं है। इसके बाद कांग्रेस और भाजपा में अब इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई छिड़ गई है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले से ही न्यायपालिका में दखल देने का काम करती रही है। जजों और न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करना कांग्रेस का इतिहास रहा है, फिर चाहे वह जस्टिस हेगड़े, जस्टिस शेलट और जस्टिस ग्रोवर का ही मामला क्यों न हो।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जज एचआर खन्ना, जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान फैसला दिया था, उन्होंने चीफ जस्टिस का पद ठुकरा दिया था। वहीं इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी का फैसला भी उनके निर्णय के बाद ही लिया था। उन्होंने कहा कि आज की सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और मैं भी शामिल हूं, जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान लड़ाई लड़ी थी। हमारी सरकार न्यायपालिका का सम्मान करती है। उधर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं दिए जाने पर मोदी सरकार पर हमला बोला है।
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि हम लगातार कह रहे हैं कि न्यायपालिका खतरे में है। कानून कहता है कि सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम कहता है, वही होगा, जबकि सरकार चाहती है कि अगर उनके मन मुताबिक नहीं हुआ तो कॉलेजियम की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी कहती है कि देश बदल रहा है, लेकिन हम कहते हैं कि देश बदल चुका है। आज सरकार न्यायपालिका के साथ जो बर्ताव कर रही है, उसे पूरा देश जानता है। सरकार की मंशा है कि वह जस्टिस जोसेफ को जज नहीं बनने देंगी। सिब्बल ने कहा कि सरकार कॉलेजियम के हिसाब से नहीं चलना चाहती। केंद्र सरकार में सूत्रों की मानें तो सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि जब किसी का नाम वापस कर दिया गया है तो उसकी नियुक्ति कैसे हो सकती है। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि जब कुछ नामों को क्लियर कर दिया गया है, वहीं कुछ को रोका भी गया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश मानते हुए सीनियर एडवोकेट इंदु मल्होत्रा को जज बनाने को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद इसकी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। दूसरी तरफ जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति न होने पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने 100 वकीलों के हस्ताक्षर के साथ एक याचिका दायर की है। इसमें इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को रोकने के लिए भी कहा गया है। जयसिंह का कहना है कि इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति गलत नहीं है। लेकिन दोनों की नियुक्ति एक साथ होनी चाहिए थी। वहीं चीफ जस्टिस की ओर से कहा गया है कि किसी जज की नियुक्ति पर स्टे वारंट देना सोच से भी परे है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभी पूरा प्रोसेस होने दिया जाए, कॉलेजियम के जरिए ही पूरी प्रक्रिया होगी।







