डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राजनीति में अक्सर कुछ दिलचस्प प्रतीक बन जाते है। ये एक साथ सिद्धान्त और व्यवहार को उजागर कर देते है। एम्स नई दिल्ली में राहुल गांधी और लालू यादव के मुलाकात में भी यही हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष सामान्य स्थिति में राजद प्रमुख लालू यादव से मिलने जाते तो इतनी चर्चा नहीं होती। तब इसे मानवीय आधार पर शिष्टाचार भेंट कहा जाता। लेकिन राहुल गांधी पहले नई दिल्ली की अपनी जन आक्रोश सभा मे भ्र्ष्टाचार पर जमकर बरसे। लगा कि भ्रस्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस मोड़ में आ गए है। यहां तक गनीमत थी। किसी का हृदय कभी भी बदल सकता है। जब जागो, तभी सबेरा। क्योकि यूपीए सरकार के दौरान तो एक बार भी ऐसा नहीं लगा था कि घोटाला या भ्र्ष्टाचार से उन्हें परेशानी होती है। घोटालों के सजायाफ्ता के चुनाव लड़ने पर रोक वाले विधेयक की प्रति उन्होंने सार्वजनिक रूप से फाड़ कर उछाल दी थी। इस बार भ्रस्टाचार के खिलाफ उनका गर्जना आश्चर्यजनक था। यह एपिसोड ठीक चला, लेकिन इसकी अगली कड़ी में वह लालू यादव से मिलने जा पहुंचे। लालू चारा घोटाले में सजा काट रहे है। कोर्ट ने उन्हें एम्स में इलाज की अनुमति दी थी। राहुल यही उनसे मिलने पहुंचे थे। चर्चा हुई कि बात केवल मिजाज जानने तक सीमित नहीं थी। अगले लोकसभा चुनाव को लेकर भी दोनों नेताओं में वार्ता हुई। लालू यादव बीमार है। लेकिन राहुल के आने और राजनीति की चर्चा से उनमें भी कुछ लम्हों के लिए रौनक आ गई।खैर वह स्वस्थ रहें।
लेकिन इस मुलाकात ने चर्चा का प्रतीक बना दिया। कुछ घण्टे पहले राहुल ईमानदारी की अलख जगा रहे थे। फिर घोटाले के सजायाफ्ता के साथ राजनीतिक जुगलबंदी। जल्दीबाजी ऐसी की जनाक्रोश सभा के बाद कुछ दिन रुकना भी मुनासिब नहीं समझा। मुलाकात तो कुछ समय बाद जेल में भी हो सकती थी। इसके अलावा लालू के पुत्र तेजश्वी यादव उत्तराधिकार संभाल रहे है। उनसे भी राहुल बात कर सकते थे। कुछ महीने तक तो ईमानदारी के प्रति आग्रह की गलतफहमी बनी रहती । कांग्रेस के लिए भी यह नया अनुभव होता। लेकिन राहुल ने अपने ही हांथो इस अहसास को हवा में उड़ा दिया। इस मुलाकात ने एक झटके में असलियत सामने ला दी। इसका सन्देश यह था कि कांग्रेस के शासन का अंदाज यूपीए वाला ही रहेगा।
लगा भी नहीं कि बात केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित थी। इस समय कांग्रेस और राजद दोनों का सियासी स्वास्थ भी समान रूप से खराब चल रहा है। कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। उसके हाँथ से अनेक प्रदेश निकल गए। बिहार में बड़ी उम्मीदों से महागठबंधन बना था। लेकिन नीतीश कुमार को लगा कि घोटालों के आरोपी के साथ रहना उनकी ईमानदार छवि को भी धूमिल कर देगा। इसलिए उन्होंने समय रहते राजद और कांग्रेस दोनों से किनारा कर लिया। इसका सीधा असर कांग्रेस और राजद की सियासी सेहत पर पड़ा था। ऐसे में लालू और राहुल की मुलाकात ने एक दूसरे का हौसला बढ़ाया होगा।
यह मुलाकात कुछ समय पहले या कुछ समय बाद होती तो इतना हंगामा न होता। सब जानते है कि बिहार में अब भी इनका गठबन्धन है। लेकिन राहुल ने आक्रोश के फौरन बाद इस मुलाकात का एजेंडा रख लिया । इस गर्म और ठंडे ने जायका बिगाड़ दिया। लोग राहुल के भाषण और लालू यादव से मुलाकात की तुकबन्दी बनाने लगे। भाजपा को भी मौका मिला।
उसके एक प्रवक्ता ने ट्वीट में इसे सजायाफ्ता और पेरोल पर रिहा वालों की मुलाकात बताया। लालू सजायाफ्ता है , और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड मामले में पेरोल पर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदियनाथ भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने राहुल से पूंछा की वह एक भ्रष्टाचारी से मिलने क्यों गए थे।
राहुल गांधी के भाषण और फिर लालू से उनकी मुलाकात को जोड़कर देखें तो कई रोचक तथ्य मिलेंगे। राहुल ने जन आक्रोश सभा में कहा नरेंद्र मोदी सत्ता के पीछे छिपे है , और हम सच के साथ खड़े है। नरेंद्र मोदी का चेहरा बदल गया है। भ्र्ष्टाचार की जड़ें गहरी हो गई है।
लोकतंत्र खतरे में है। विमान हादसे से शिव जी ने बचाया ,इस लिए कैलाश मानसरोवर जाऊँगा।
नरेंद्र मोदी ने लोगों के पैसे इकट्ठे कराए ,उसे नीरव मोदी को दे दिया , वह विदेश भाग गया। पीयूष गोयल ने एक पावर कम्पनी को अपनी कम्पनी अड़तालीस करोड़ में बेच दी । राफेल में गड़बड़ी, अमित शाह के बेटे ने गड़बड़ी की , लेकिन नरेंद्र मोदी इन पर कुछ नहीं बोलते।
राहुल गांधी के आरोपों का अंदाज बिल्कुल वैसा है , जैसे कभी आप नेता अरविंद केजरीवाल लगाया करते थे। वह भी नाम लेकर भ्र्ष्टाचार के आरोप लगाते थे। यह भी कहते थे कि उनके पास पुख्ता सबूत है। लेकिन उनके आरोप पर अनेक नेताओं ने मानहानि का दावा किया। कई वर्ष बीतने के बाद क्या हुआ। अरविंद केजरीवाल को उन सभी नेताओं से लिखित माफी मांगनी पड़ी। पता नही उनके पास जो पुख्ता सबूत थे ,उनका क्या हुआ। लेकिन तब ऐसे आरोप लगाने का केजरीवाल को बहुत फायदा हुआ था। लगा था कि वह नई राजनीति शुरू कर रहे है। अब पता चला कि यह तो पुरानी से भी बदतर है।
लगता है कि राहुल को भी केजरीवाल की तरह सलाह दी गई है कि वह भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इससे कांग्रेस की ईमानदार छवि बनेगी। लेकिन राहुल की बात से कांग्रेस के प्रति आक्रोश कम नहीं हो रहा है। राहुल के सामने सुब्रामणियम स्वामी की तरह विकल्प है । जैसे उनके ऊपर नेशनल हेराल्ड घोटाले का केस स्वामी ने दर्ज कराया , वैसा ही राहुल भाजपा नेताओं के खिलाफ भी दर्ज करा सकते है। लेकिन वह कई वर्षो से केजरीवाल की तरह आरोप लगा रहे है। केजरीवाल की पार्टी नई बनी थी। उसे इस चाल का फायदा मिला । लेकिन कांग्रेस सबसे अधिक समय तक शासन करने वाली पार्टी है। भ्र्ष्टाचार के मामले में उसकी कैसी छवि है ,इसे राहुल भी समझते होंगे। इसमें केवल भाषण और दूसरों पर आरोप लगाने से सुधार नहीं होगा। रही सही कसर लालू यादव से वार्ता और गठबन्धन से पूरी हो जाती है।







