- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने रेग्यूलेटरी सरचार्ज समाप्त करने ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में कमी करने व घरेलू उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज को खत्म करने के लिये की जोरदार बहस और सौंपे साक्ष्य
- आयेाग ने फैसला किया सुरक्षित जरूरत पडने पर आगे भी कर सकता है और सुनवाई
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष के सवालों के सामने पावर कारपोरेशन की बोलती बंद
लखनऊ, 02 मई। प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 30 नवम्बर 2017 को विद्युत नियामक आयोग द्वारा बडे पैमाने पर बढोत्तरी की गयी थी जिसके खिलाफ उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल पुनर्विचार लोक महत्व याचिका व पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल रिव्यू याचिका पर आज उप्र विद्युत नियामक आयोग सभागार में नियामक आयोग अध्यक्ष एस के अग्रवाल सदस्य कौशल किशोर शर्मा, सचिव संजय श्रीवास्तव, निदेशक टैरिफ डा. अमित भार्गव, उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियन्ता, रेग्यूलेटरी अफैयर्स नीरज अग्रवाल, पावर कारपोरेशन के एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव सहित बिजली कम्पनियों के अनेकों अधिकारियों की उपस्थित में सम्पन्न हुयी। सुनवाई काफी हंगामेदार रही। अन्तताः आयोग ने आज की सुनवाई का फैसला सुरक्षित कर लिया जरूरत पडने पर आयोग आगे भी सुनवाई करेगा, जैसा आयोग अध्यक्ष द्धारा कहा गया है। उपभोक्ता परिषद के विधिक सवालों व साक्ष्यों के सामने पावर कारपोरेशन जवाब देने से कतराता रहा।
पावर कारपोरेशन की तरफ से मुख्य अभियन्ता, रेग्यूलेटरी अफैयर्स व पावर कारपोरेशन के अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव द्वारा अपना पक्ष रखते हुये डिप्रीसिएशन रेग्यूलेटरी सरचार्ज, फ्यूल परिचेज एडजस्टमेन्ट कास्ट व अतिरिक्त सब्सिडी पर अपनी बात रखी गयी और कैरिंग कास्ट का मुददा उठाया गया। निश्चित तौर पर पावर कारपोरेशन बडी चालाकी से चोर दरवाजे से बिजली दरों में और बढोत्तरी कराने के लिये लगा रहा।
प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से पुनर्विचार याचिकाकर्ता उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अपनी बहस शुरू करते हुये कहा कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं पर लगने वाला रेग्यूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत को अविलम्ब समाप्त होना चाहिये। जिस प्रकार से रेग्यूलेटरी सरचार्ज पर पिछले कई वर्षों से 10 से 12.5 प्रतिशत कैरिंग कास्ट अनुमोदित किया जा रहा है उससे उपभोक्ता जन्म जन्मान्तर तक रेग्यूलेटरी सरचार्ज अदा करेंगे फिर भी वह समाप्त नही होगा। उपभोक्ता परिषद आज जो खुलासा करने जा रहा है उससे स्वतः रेग्यूलेटरी सरचार्ज समाप्त करना पडेगा। वर्ष 2014 में पावर कारपोरेशन द्वारा मा. अपलेट ट्रिब्यूनल दिल्ली में नियामक आयोग आदेश के खिलाफ एक याचिका दाखिल की गयी थी जिसमें मा. अपटेल द्वारा कारपोरेशन के खिलफ 2015 में यह फैसला सुनाया गया था कि चॅूकि बिजली कम्पनियाॅं समय से सीएजी आडिट के आधार पर टूª-अप याचिका नही दाखिल करती इसलिये उन्हें कैरिंग कास्ट नही एलाउ किया जायेगा। अन्यथा उपभोक्ताओं पर भारी भार पडेगा। ऐसे में समय से आडिट न कराकर देर से दाखिल किये गये वर्ष 2007-08 के बाद जो रेग्यूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत वसूला जा रहा है उस पर लगने वाले कैरिंग कास्ट को खत्म करना विधिक मजबूरी हैै ऐसे में स्वतः रेग्यूलेटरी सरचार्ज समापत होगा। उपभोक्ता परिषद ने अपटेल आर्डर को सौंपा और कहा यह आदेश लागू करना बाध्यकारी श्रेणी में पारित किया गया है। जिस पर पावर कारपोरेशन हक्का बक्का रह गया।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पावर कारपोरेशन को आडे हाथों लेते हुये कहा कि एक तरफ पावर कारपोरेशन कैरिंग कास्ट व फ्यूल परिचेज एडजस्टमेन्ट कास्ट की बात करता है तो ऐसे में उपभोक्ताओं की जो बिजली दरें और बढेंगी उस पर चुप क्यों है? सीधे यह क्यों नही कहा कि बिजली दरों में बढोत्तरी का यह एक नया चोर दरवाजे का प्रस्ताव है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कारपोरेशन द्वारा आयेाग आदेश पर ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 1 अप्रैल 2018 के बाद रू0 300 प्रति किलोवाट की जगह जो रू0 400 प्रति किलोवाट कर दिया गया है। वह असंवैधानिक है इसपर रोक लगनी चाहियें क्योंकि टैरिफ की सुनवाई वर्ष 2017-18 के लिये की गयी थी इसलिये आयोग द्वारा 1 अप्रैल 2018 के बाद जारी आदेश वर्ष 2018-19 के अन्तर्गत आ जायेगा जो उचित नही है। उपभोक्ता परिषद ने आगे यह भी बात रखी कि गा्रमीण उपभोक्ता व किसान दोनों एक ही व्यक्ति हैं। इसलिये उनकी दरों में की गयी बढोत्तरी कम होनी चाहिये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जब पूर्व में बिजली दर बढोत्तरी के खिलाफ उपभोक्ता परिषद लडाई लड रहा था उस दौरान पावर कारपोरेशन ने लिखित में कहा था कि वर्ष 2017-18 में लाइन हानियाॅं 15 प्रतिशत से लाई जायेगी। ऐसे में आयोग ने 21 प्रतिशत लाइन हानियों पर टैरिफ क्यों तय किया? इसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में 10 वर्ष पहले ऊर्जा विभाग द्वारा शपथ पत्र दिया गया था कि 2 वर्ष में लाइन लास 15 प्रतिशत कर लिया जायेगा। वह भी कारपोरेशन भूल गया । ऐसे में बिजली कम्पनियों के भ्रष्टाचार व अक्षमता का खामियाजा उपभोक्ता क्यों भुगते?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद पीठ के 24 धण्टे सप्लाई वाले एक आदेश का खुलासा करते हुये कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं पर लगने वाला फिक्स चार्ज समापत होना चाहिये क्योंकि जब पूरे प्रदेश में समान रूप से फिक्स बिजली नही दी जाती ऐसे में एक समान फिक्स चार्ज क्यों? उपभोक्ता परिषद ने सरकारी विभागों के लगभग 10 हजार करोड के बकाये पर भी सवाल उठाया।







