- शेरों के संरक्षण के लिए खास तौर पर जाना जाता है रणथंभौर ‘टाइगर रिजर्व’
- सरकार की खास नीतियों के चलते तेजी से बढ़ी है शेरों की संख्या
- लाखों की संख्या में आते हर साल पर्यटक
- यूनेस्को ने रणथंभौर को खूबसूरत विश्व धरोहर स्थल में भी शामिल किया है
राजस्थान राज्य में स्थित रणथंभौर ‘टाइगर रिजर्व’ के लिए खासा प्रसिद्ध है यहां का यह पर्यटन स्थल दुनिया भर जाना जाता है। यह उद्यान अरावली रेंज और विंध्य पठार के बीच में स्थित है, जो की सवाई माधोपुर से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सन 1955 पहली बार भारत सरकार ने ‘सवाई माधोपुर खेल अभयारण्य’ के रूप में इसकी स्थापना की, बाद में, 1973 में यह प्रोजेक्ट टाइगर के लिए एक आरक्षित घोषित किया गया था। सन 1980 में इसको राष्ट्रीय पार्क का दर्जा मिला।

तेजी से बढ़ी है शेरों की संख्या:
राजस्थान के वन विभाग ने अभी विधानसभा में पेश एक ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी कि रणथम्भौर में पिछले कुछ वर्षों में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इस समय नर-मादा मिलाकर कुल 62 बाघ हैं। इनमें से आठ बाघ पिछले कुछ समय से नजर नहीं आ रहे हैं। करीब बीस प्रतिशत बाघ अधिक उम्र व प्राकृतिक कारणों से मर जाते हैं। रणथम्भौर अभयारण्य लगभग 932 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यह उद्यान अरावली रेंज और विंध्य पठार के बीच में स्थित है।
बहुत बड़ा है रणथंभौर का किला:
रणथंभौर के क़िले से यहां पर स्थित राष्ट्रीय उद्यान का दृश्य राजस्थान राज्य का इतिहास अपने आप में कई ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी हैं। रणथंभौर क़िले के समय काल एवं निर्माता के बारे में कोई निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है कि इस क़िले का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था। इस किले की प्रसिद्धि ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी तक आते आते इतनी अधिक फैल चुकी थी कि तत्कालीन समय के विभिन्न ऐतिहासिक महत्त्व के ग्रंथों में इसका उल्लेख अवश्य मिलता है।भारतीय इतिहास में सर्वप्रथम इस क़िले पर चौहानों के अधिकार का उल्लेख मिलता है। यह बहुत बड़ा पहाड़ी दुर्ग है। अपनी प्राकृतिक बनावट के लिए यह बहुत प्रसिद्ध है। यह दुर्ग ऊँची पहाड़ियों के पठार पर बना हुआ है, लेकिन प्रकृति ने इसे अपने गोद में इस तरह समेटा है कि मुख्य द्वार पर पहुँचकर ही इस दुर्ग के दर्शन किये जा सकते हैं। इस दुर्ग के प्राचीर से काफ़ी दूर तक शत्रु पर निगाह रखी जा सकती थी। यह क़िला चारों ओर सघन वनों से भरा हुआ है और चम्बल की घाटी पर अपना दबदबा बनाये हुए है। 21 जून 2013 को यूनेस्को ने राजस्थान में स्थित रणथंभौर को विश्व धरोहर स्थल में भी शामिल किया है।
हवाई, रेल और सड़क मार्ग से भी पंहुचा जा सकता है रणथंभौर:
राजस्थान के रणथम्भोर सवाई माधोपुर शहर से 12 किमी की दूरी पर स्तिथ है। इस जगह का नाम दो पहाड़ियों के नाम रन और थम्बोर के नाम से पड़ा है। रणथंभौर तक हवाई, रेल और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है, जयपुर में सांगानेर हवाई अड्डे रणथंभौर से सबसे नजदीक एयरबेस है, जबकि सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन निकटतम रेलवे स्टेशन है। यह जगह वर्ष भर एक आदर्श जलवायु है। इस जगह की यात्रा का सबसे उत्तम समय अक्टूबर और अप्रैल के मध्य है। इस वक्त के दौरान, मौसम सुखद और दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए एकदम सही समय होता है।
– जी के चक्रवर्ती







