हिल स्टेशन: दार्जिलिंग को वैसे तो ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ के नाम से जाना जाता है लेकिन यहाँ बागानों की चाय की महक तो दुनिया भर में मशहूर है और यदि आप यहाँ घूमने का प्लान बना रहे है तो इससे बेहतर और कोई विकल्प हो ही नहीं सकता। आप यहाँ टॉल टॉय ट्रेन में जरूर सफर करें इससे आपका मज़ा और दुगना हो जायेगा। वैसे भी दार्जिलिंग की गिनती दुनियाभर के मशहूर एवं खूबसूरत पर्वतीय स्थानों मे की जाती है।
दार्जिलिंग यह प्रदेश पश्चिम बंगाल राज्य के दूरवर्ती इलाके में स्थित है। यह स्थान कोलकाता से 491 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। दार्जीलिंग नगर सिक्किम हिमालय के लंबे एवं संकरे कटाव पर रांगित नदी के तल की ओर से अचानक ढलान से उतरता हुआ स्थान है। दर्जिलिंग शहर समुद्र तल से लगभग 2,100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहां पर साफ़ मौसम वाले दिनों में दार्जिलिंग से कंचनजंगा पहाड़ी का भव्य दृश्य दिखाई देता है जो कि 8,586 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और इसके विल्कुल पास के पर्वत टाइगर हिल एक दर्शनीय स्थल है जहां से माउन्ट एवरेस्ट को देखा जा सकता है।
अनमोल पत्थर:
वास्तव में दार्जिलिंग शब्द तिब्बती शब्द ‘दोर्जी’ से लिया गया है जिसका शाब्दिक अर्थ अनमोल पत्थर। धार्मिक दृष्टि से ‘दोर्जी’ का अर्थ है इंद्र देवता का ‘बज्र’ है, इसलिये इसे ठंडा बोल्ट भी कहा जाता है। दार्जिलिंग जिले का दूसरा महकमा खरसांग (कर्सियांग) है जो सफ़ेद ‘आर्किड’ (एक प्रकार का फुल ) जिसका स्थानीय नाम सुनखरी के नाम से जाना जाता है। इसी के अनुसार इस जगह का नाम रखा गया है।

पहाडों की रानी:
दार्जिलिंग को ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ ( पहाड़ो की रानी ) के नाम से भी जाना जाता है। दार्जिलिंग प्रेमी युगल एवं नव विवाहहितों के लिए सदा से एक खूबसूरत हनीमून मनाने का स्थान रहा है। इस पर्वतीय स्थान की सबसे बड़ी प्रमुखता यह है कि यहां पर दूर-दूर तक फैले हरे भरे चाय के खेत मानो धरती पर हरी चादर बिछी है। एक समय दार्जिलिंग अपने मसालों के लिए सम्पूर्ण देश मे प्रसिद्ध हुआ करता था लेकिन वर्तमान समय मे यह चाय के लिए इसे विश्वस्तर पर जाना पहचाना जाता है। यहां स्थित प्रत्येक चाय के उद्यानों का अलग इतिहास के साथ ही विशेषताएं भी है। इसकी गिनती दुनियाभर के मशहूर एवं खूबसूरत पर्वतीय स्थानों मे की जाती है।
टॉय ट्रेन से सैर:
दार्जिलिंग की सैर टॉय ट्रेन से शुरू होती है जो पहाड़ियों और खूबसूरत वादियों के बीच से होते हुए गुजरती है। इस यात्रा के दौरान चाय के बागान, देवदार के बृक्षों के वन, तीस्ता एवं रंगीत नदियों के संगम के खूबसूरत एवं अद्भुत नजारे सैलानियों का मन मोह लेते हैं। बतसिया लूप से गुजरते वक्त यह ट्रेन वृत्ताकार घूमती हुई चलती है जिसकी वजह से यात्रियों को 180 डिग्री कोण के भीतर पहाड़ियां नजर आती हैं।
टाइगर हिल: सूर्योदय का अद्भुत दृश्य
दार्जिलिंग की एक मशहूर जगह टाइगर हिल है जो शहर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस जगह से सूर्योदय का अद्भुत दृश्य अत्यंत सुंदर दिखाई देता है। यही कारण है कि कंचनजंगा की पहाड़ियों के पीछे से सूर्योदय होते हुए उसके प्रकाश का सतरंगी नजारे को देखने के लिए रोजाना देश-विदेश से अनेको पर्यटक यहां पर आते रहते हैं। यदि यहां का मौसम साफ है तो इस स्थान से विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट दिखाई देती है।
यह है खास: संजय गांधी जैविक उद्यान
दार्जिलिंग में संजय गांधी जैविक उद्यान स्थित है, जहां रेड पांडा और ब्लैक बीयर जैसी दुनिया की कई दुर्लभ प्रजातियों के जानवर एवं पशु-पक्षी देखने को मिलते हैं। पर्यटक यहां तिब्बतियन भेड़िए एवं साइबेरियन बाघ को देखने का आनंद ले सकते हैं। दार्जिलिंग में देश का पहला रंगीन रोपवे भी है।
कैसे जाएँ :
हवाई जहाज़, रेल, बस जैसी सभी तरह की सुविधाओं के द्वारा यहां पहुँचा जा सकता है। पश्चिम बंगाल के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा एवं दमदम हवाई अड्डे से यहां से उड़ाने भारती है यहां के जलपाईगुडी रेलवे स्टेशन से साइकिल-रिक्शा, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, सिटी बस और ट्राम द्वारा इनमे से किसी भी साधन द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है। – जी के चक्रवर्ती







