अयोध्या-काशी-प्रयागराज से आगे, छिपे रत्नों को मिलेगी नई पहचान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का दायरा तेजी से फैल रहा है। अब सरकार सिर्फ चर्चित तीर्थों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि प्रदेश के कम चर्चित और अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने की बड़ी योजना बना रही है।
स्पिरिचुअल ट्रायंगल के साथ नए केंद्रों पर फोकस
पर्यटन विभाग अयोध्या, काशी और प्रयागराज को जोड़ने वाले स्पिरिचुअल ट्रायंगल के विकास के साथ-साथ मथुरा, नैमिषारण्य, विंध्याचल जैसे प्रमुख केंद्रों को भी प्राथमिकता दे रहा है। साथ ही उन प्राचीन मंदिरों, आश्रमों और पौराणिक स्थलों को भी विकसित किया जाएगा जिनके बारे में आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है।
विकास, सुविधाएं और व्यापक प्रचार
इन अल्पज्ञात तीर्थस्थलों पर सौंदर्यीकरण, बेहतर सड़कें, आवास, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही इन स्थलों का प्रभावी प्रचार-प्रसार कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति बनाई जा रही है।
सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक उन्नति
सरकार का मानना है कि धार्मिक पर्यटन के विस्तार से न सिर्फ UP की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। बता दें कि यह पहल उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







