उपभोक्ता परिषद ने किया सबसे बड़ा खुलासा: पिछले 9 माह में यूपी के सरकारी विभागों पर बढ़ा गया रू. 1869 करोड़ का बकाया
लखनऊ 24 मई। प्रदेश में भले ही छोटे बिजली उपभोक्ताओं के हजारों के बकाये पर उसके कनेक्शन काट दिये जाते हैं। वहीं प्रदेश के सरकारी विभाग करोड़ों के बकायेदार होने के बाद भी बिजली का आनन्द ले रहे हैं। भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय के उदय न्यूज में अभी मई, 2018 में जारी हुए आंकड़े पर नजर डालें तो सरकारी विभागों पर बकाये में देश के टाप टेन बकायेदारों में उप्र का सरकारी विभाग सबसे शीर्ष पर है, जो चिन्ता का विषय है।
जहां तक बात 31 मार्च, 2017 की है तो प्रदेश में सरकारी विभागों पर कुल बकाया रू. 8853 करोड़ था, वह अब दिसम्बर, 2017 के अन्त तक 10722 करोड़ हो गया है। यानि की प्रदेश के सरकारी विभागों पर पिछले 9 माह में लगभग रू. 1869 करोड़ बकाया बढ़ गया, जो सोचनीय है। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री व मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश के सरकारी विभागों पर जो बकाया है, उसे बजटीय प्राविधान बनाकर बिजली विभाग को दिलाया जाये और इस भीषण गर्मी में छोटे बकायेदारों, घरेलू ग्रामीण किसानों के कनेक्शन काटने पर ज्यादा सख्ती न की जाये।
देश के टाप टेन राज्यों में उप्र में सरकारी विभागों के बकाये की स्थिति स्वतः बयां कर रही है तो आइयें एक नज़र डालते है आकड़ों पर-
राज्य 31 दिसम्बर, 2017 तक सरकारी विभागों पर बकाया
उत्तर प्रदेश 10722 करोड़
तेलंगाना 4430 करोड़
महाराष्ट्र 5600 करोड़
आन्ध्र प्रदेश 3803 करोड़
केरल 4910 करोड़
हरियाणा 1185 करोड़
कर्नाटक 2307 करोड़
बिहार 902 करोड़
राजस्थान 1006 करोड़
मध्य प्रदेश 890 करोड़
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उप्र में सरकारी विभागों में हमेशा करोड़ों का बकाया रहता है, उनके कनेक्शन भी काटे जाते हैं और सिर्फ कोरे आश्वासन के बाद कुछ ही घण्टों में कनेक्शन जोड़ दिये जाते हैं। उप्र सरकार चाहे तो बजटीय प्राविधानों के अनुसार सभी विभागों का एक मुश्त बकाया पावर कार्पोरेशन को दिलाया जा सकता है। बिजली दर बढ़ाने की बात आती है तो आम जनता की दरों में बढ़ोत्तरी करायी जाती है और सरकारी विभाग पर रहम किया जाता है।
वास्तव में सरकार को आगे आकर सरकारी विभागों के बकाये को बिजली विभाग को वापस दिलाकर गरीब जनता, किसानों की बिजली दरों में राहत प्रदान किया जाना चाहिए। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि उप्र में सरकारी विभागों का बकाया बढ़ता रहता है और बिजली कम्पनियां चाहकर भी कुछ नहीं कर पातीं। वहीं दूसरी ओर छोटे-छोटे विद्युत बकायेदारों को चिन्हित कर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है, जो पूरी तरह न्यायोचित नहीं है।







