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लेसा के उपभोक्ताओं द्वारा लिया गया कुल संयोजित भार 26 लाख 70 हजार किलोवाट वहीं लेसा के 33/11 केवी सबस्टेशनों की क्षमता मात्र 18 लाख 21 हजार किलोवाट, सिस्टम मिसमैच 8 लाख किलोवाट का अन्तर। ऐसे में पीक आवर्स में सिस्टम पूरी तरीके से काॅंपेगा
लखनऊ 30 मई। लेसा मध्यांचल की बदहाल विद्युत व्यवस्था में व्यापक सुधार कराने के लिये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने आज नियामक आयोग सदस्य कौशल किशोर शर्मा व सचिव संजय श्रीवास्तव से मिलकर एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा। उपभोक्ता परिषद द्वारा सौंपे गये जनहित प्रत्यावदेन में यह मुददा उठाया कि वर्तमान में लेसा की विद्युत व्यवस्था काफी खस्ता हाल है। बिजली कम्पनियों के दावों की पोल खुल गयी है। जब उपभोक्ता परिषद ने इसकी तहकीकात की तो बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया।
उन्होंने बताया कि पूरे लेसा में लगभग 9 लाख 52 हजार उपभोक्ता हैं। जिनके द्वारा लिया गया कुल संयोजित भार लगभग 26 लाख 70 हजार किलोवाट है। वहीं लेसा अन्तर्गत 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्रों की क्षमता लगभग 2024 एमबीए है। यदि इसे किलोवाट में निकाला जाये तो यह 18 लाख 21 हजार किलोवाट होगा। यानि कि उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार और सिस्टम के बीच लगभग 8 लाख किलोवाट का गैप है। पीक आवर्स में जब उपभोक्ता अपना पूरे भार का उपभोग करता है उस दौरान सिस्टम काॅंपने लगता है। पीक आवर्स में डायवरसी फैक्टर 1ः1 होता है। ऊपर से सिस्टम पर लगभग 23 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड। ऐसे में जब तक लेसा का सिस्टम पूरी तरीके से उच्चीकृत नही किया जाता इसी तरह उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पडेगी।
आयोग द्वारा वर्ष 2012 में उपभोक्ता परिषद के प्रत्यावेदन पर लेसा के लिये इस मामले में पूर्व में भी आदेश जारी किया गया था लेकिन उस पर आज तक उचित कार्यवाही नही की गयी। अन्यथा ऐसी स्थिति न आती और आज सिस्टम पूरी तरह सुदृढ होता।
जब भी सिस्टम की बात आती है तुरन्त विभाग के अधिकारी रटा रटाया जवाब शुरू कर देते हैं कि लेसा के उपभोक्ताओं के भार बहुंत कम हैं और वह ज्यादा भार का उपभोग कर रहे हैं उन्हें बढाया जाये जबकि हकीकत में लेसा को अपने सिस्टम का भार बढाना चाहिये। विद्युत वितरण संहिता 2005 की धारा 4.2 (ए) में प्राविधानित है कि सिस्टम का भार जैसे ही 80 प्रतिशत पर पहुचेगा तुरन्त उसका सुदृणीकरण करना अनिवार्य है लेकिन उस पर लेसा प्रशासन ध्यान नही दे रहा है। जो चिन्ता का विषय है।
आयोग द्वारा पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अविलम्ब उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को उपभोक्ताओं के हित में उचित निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कारपोरेशन प्रबन्धन के सामने यह भी मुददा उठाया है कि जहाॅं तक विद्युत उपभोक्ताओं के भार बढाने का मामला है तो विद्युत वितरण संहिता व टैरिफ प्राविधानों के अनुसार जब तक घरेलू उपभोक्ता का लगातार 3 महीने तक एमडीआई में भार अधिक नही आता तब तक उसके भार को बढाने का नोटिस नही दिया जा सकता। और साथ ही जहाॅं तक सवाल है लेसा द्वारा किसी माह भार अधिक हो जाने पर एसएमएस भेजकर भार बढाने हेतु दबाव बनाने का तो वह पूरी तरह असंवैधानिक है। किसी भी माह यदि किसी उपभोक्ता द्वारा लिये गये भार से उस माह में ज्यादा भार एमडीआई मीटर में रिकार्ड हेाता है तो उस बढे भार पर उपभोक्ताओं को टैरिफ आदेशानुसार अतिरिक्त चार्ज देना होगा। उदाहरण के लिये यदि किसी उपभोक्ता का भार 2 किलोवाट है ओर उसके द्वारा 2.18 एमडीआई रिकार्ड होती है तो उसे उस माह में उसे केवल 180 वाट का अतिरिक्त चार्ज रूपया 36 देना होगा।