डीजीपी से मिलने जा रहें फोरम को पुलिस ने विधान सभा पर रोका
लखनऊ, 13 जुलाई 2018: ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में बढ़ते “पुलिस टार्चर के शिकार पीड़ितो ने ‘स्टाप पुलिस टार्चर’, ‘से नो टू टार्चर’, ‘पुलिस टार्चर इज ए क्राइम’, ‘वी वांट स्टाप टार्चर एंड एकाउंटबिलीटी नाऊ’, ‘पुलिस प्रताड़ना पर रोक लगाओ और मानव गरिमा की सुरक्षा करों’ की तख्तियों को हाथ में और मुह पर काली पट्टी बाधकर केकेसी लखनऊ से मार्च निकाला जो हुसैनगंज, विधानसभा पर पुलिस ने जबरन रोक दिया और डीजीपी से मिलने जाने नहीं दिया तत्पश्चात वही पर मार्च सभा में तब्दील हो गया।
सभा का संचालन करते हुए ह्यूमन राईट्स मोनिटरिंग फोरम के सदस्य एड. वीरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा की आज उत्तर प्रदेश की पुलिस अमानवीय होती जा रही हैं जो की घोर चिंता का विषय हैं। मानव अधिकारों की रक्षा और पुलिस टार्चर की घटनाओं को रोकने के सम्बन्ध में डीजीपी से मिलने जा रहें पीड़ित परिवार और फोरम के सदस्यों रोकना निंदनीय हैं।
सभा में ह्यूमन राईट्स मोनिटरिंग फोरम के सचिव अमित ने कहा की उत्तर प्रदेश में लगातार पुलिस प्रताड़ना की घटनाए बढती जा रही हैं और सरकार टार्चर के निवारण के लिए कोई ठोस उपाय नहीं कर रही हैं, जबकि भारत सरकार ने 1997 में यूएन के कन्वेंशन अगेंस्ट टार्चर पर हस्ताक्षर कर टार्चर को ख़त्म करने की बात कही हैं! यदि टार्चर और दुर्व्यवहार के निवारण के लिए नियम-कानून लागू कर पुलिस की जवाबदेही तय किया जाए तो पुलिस प्रताड़ना को रोका जा सकता है।
सभा को संबोधित करते हुए विडियो वालंटियर्स के राज्य समन्वयक अशुमान ने कहा हमारे सविधान में मानव गरिमा की सुरक्षा की बात कही गयी है और पुलिस टार्चर की घटनाओं को रोकने के लिए मा.उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश होने के बावजूद आम नागरिकों पर बर्बरतापूर्ण पुलिसिया कार्यवाही जारी है और सरकार पुलिस टार्चर को रोकने और पीड़ितों की मदद के बजाय आरोपी पुलिस वालों को बचाने में लगी रहती है।
सामाजिक कार्यकर्ता एव फोरम के सदस्य मुन्ना ने कहा सरकार मानवाधिकारों के हित की बात तो करती हैं लेकिन उसे लागू करने की बात नहीं करती। यही असल वजह है की पुलिस उत्पीड़न की घटनाए रुकने की बजाय बढती ही जा रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एव फोरम के सदस्य सुरेश भारती ने कहा की सुरक्षा के नाम पर पुलिस आम नागरिको का लगातार उत्पीडन कर रही हैं। उन्होंने कहा की अब तो घर से बाहर निकलने में डर लगता हैं की कही उत्तर प्रदेश की पुलिस फर्जी मुकदमें न फसा दे। पुलिस और अपराधियों की साठगाठ की वजह से पीड़ित और आम नागरिक थाने के अन्दर जाने में डरते हैं।








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