डॉ दिलीप अग्निहोत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का संकल्प लिया था। सीमित अवधि में ही यह साकार हो रहा है। यहां तक पहुचने के लिए योगी आदित्यनाथ ने अथक मेहनत की है। उन्होंने समग्र विकास से संबंधित सभी पहलुओं पर ध्यान दिया। उन्हें जो विरासत मिली थी उसमें यह कार्य मुश्किल था। नौकरशाही भी इसके प्रति अभ्यस्त नहीं रह गई थी। योगी ने सभी बिंदुओं पर सुधार किया।उन्होंने पल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन से पहले अनुकूल माहौल बनाया। यही कारण था कि समिट सफल रही। अब उनका शिलान्यास भी होने लगा। योगी ने प्रदेश के सभी जिलों में जाकर जमीनी जानकारी प्राप्त की। केंद्र सरकार की योजनाओं को प्राथमिकता से लागू किया। अनेक योजनाओं में रिकार्ड कार्य करा दिया। व्यापार सुगमता में उत्तर प्रदेश ऊपर आने लगा।
एक साथ इतनी औद्योगिक परियोजनाओं का शिलान्यास अभूतपूर्व ही कहा जायेगा। जिस प्रकार इन्वेस्टर्स समिट से पहले योगी आदित्यनाथ ने व्यापक तैयारियां की थी, देश के प्रमुख उद्योगिक नगरों में रोड शो किये गए। उद्योगपतियों को बताया गया कि उत्तर प्रदेश में केवल सरकार ही नही बदली है बल्कि व्यवस्था भी बदल गई है। ऐसा नहीं यह बात केवल उद्योग जगत को बताने के लिए नहीं कही गई। योगी ने शुरुआत से ही इन बातों पर विशेष ध्यान दिया था। उन्होंने निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के बाद ही उद्योग जगत को आमंत्रित किया था। पिछली सरकार इसका उल्टा करती थी। वह प्रचार के लिए इन्वेस्टर्स समिट तो करती थी ,लेकिन इसके अनुरूप सुधार पर कोई ध्यान नहीं रहता था। इसलिए उन्हें सफलता नहीं मिली। योगी ने सुधारो पर पहले कार्य किया। यही कारण है के डेढ़ वर्ष में योजनाओं के शिलान्यास होने लगे।
इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रदेश में साढ़े चार लाख करोड़ रुपये के एक हजार पैंतालीस एमओयू करने वाले निवेशकों के साथ संवाद कर उनकी प्रगति जानी और समस्याओं का निराकरण किया। शिलान्यास से पहले परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए एक-एक निवेशक से बात की। विगत पन्द्रह वर्षों में जितना निवेश प्रदेश में हुआ है उससे अधिक निवेश एक ही वर्ष में होगा। संबंधित विभागों को निवेशकों को प्रोविजनल लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के निर्देश दिए थे। पचास करोड़ से अधिक के निवेश वाली अस्सी से अधिक बड़ी परियोजनाएं राज्य स्तर पर और एक करोड़ रुपये से अधिक की छह सौ सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयां जिला स्तर पर शिलान्यास भी शीघ्र ही किया जाएगा।
एक हजार पैंतालीस में से करीब साठ परियोजनाएं पहले चरण में शुरू होंगी, ये देश में एक रिकार्ड होगा। अभी तक सभी प्रदेशों में हुई समिट का रिजल्ट बारह प्रतिशत से अधिक नहीं रहा है। इतना ही नहीं प्रत्येक दो महीने बाद आयोजित किए जाएंगे ।
पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में जितना निवेश पांच वर्ष में हुआ है, उससे अधिक राशि से जुड़े निवेश प्रोजेक्ट का एक साथ शिलान्यास करवाकर सरकार बड़ा संदेश देना चाहती है। सरकार के स्तर से शिलान्यास के लिए काफी दिनों से पीएम का समय लेने का प्रयास चल रहा है। अनेक दिग्गज उद्योगपतियों के आईटी, पर्यटन, सीमेंट, फूड प्रोसेसिंग, मोबाइल, डेयरी आदि के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। जिन-जिन उद्योगपतियों के प्रोजेक्ट का शिलान्यास होगा, उन सभी को आमंत्रित किया जाएगा। ये प्रोजेक्ट राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगेंगे।
इसके पहले कभी भी इतनी बड़ी तादाद में उद्योगों की स्थापना की कार्यवाही नहीं हुई है। निवेश के दावे हकीकत में उतरना राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।उत्तर प्रदेश में लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक जिला एक उत्पाद योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के द्वारा स्थानीय कौशल का विकास तो होगा ही, इसी के साथ वस्तुओं का निर्यात भी होगा, इससे देश की जीडीपी भी बढ़ेगी। इस योजना के द्वारा जिले के छोटे, मध्यम और परंपरागत उद्योगो का विकास होगा।
इस योजना के द्वारा उद्योगो को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नयी तकनीको का प्रयोग और प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिससे यह प्रोडक्ट मार्केट में उपलब्ध अन्य प्रोडक्ट की बराबरी कर सके। इस योजना के द्वारा स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा। अब तक के अनुमान के अनुसार अगले आने वाले पांच वर्षों में लगभग पच्चीस लाख लोगो को रोजगार मिलेगा। सरकार के द्वारा पच्चीस हजार करोड़ रुपये स्थानीय व्यापार की उन्नति के लिए खर्च किये जायेंगे।
इस योजना के द्वारा इन जिलों में बने प्रोडक्ट की अच्छी पैकिंग की जाएगी ,जिससे उन्हें बाजार में जगह मिले। उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए ही मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद योजना बनाई। एक जिला एक उत्पाद योजना को केंद्र सरकार के मुद्रा योजना, स्किल इंडिया मिशन से, स्टैंड अप इंडिया-स्टार्ट अप इंडिया मिशन से अतिरिक्त लाभ प्रदान किया जाएगा। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत जिलों के उत्पाद को नया कलेवर देते हुए उनकी पैकेजिंग की जाएगी। ब्राड यूपी की सोच को राज्य से आगे देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
आगरा काचमड़ा उत्पाद, फिरोजाबाद का ग्लास बैंगिल्स, मथुरा का बाथरूम फिटिंग्स, मैनपुरी की तारकशी, अलीगढ़ का ताला व हार्डवेयर, हाथरस की हींग प्रोसेसिंग, एटा के घुंघरू, घंटी, कासगंज की जरी जरदोजी, इलाहाबाद का अमरूद फ्रूट उत्पाद, प्रतापगढ़ का आंवला उत्पाद, कौशाम्बी का केला उत्पाद, आजमगढ़ का ब्लैक पाटरी, बलिया की बिंदी,मऊ का पावरलूम,बरेली की जरी वर्क, बदायूं की जरी वर्क पीलीभीत बांसुरी,शाहजहांपुर की जरी वर्क, संतकबीर नगर के पीतल बर्तन,सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल उत्पाद,चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने बांदा का सजर स्टोन क्राफ्ट, महोबा का गौरा स्टोन क्राफ्ट हमीरपुर के जूते गोंडा का दाल उत्पाद बहराइच की गेंहू के डंठल की कला कृतियां बलरामपुर दाल फूड प्रोसेसिंग, फैजाबाद का गुड़ एवं जेगरी उत्पाद, बारांबकी का स्टोल दुपट्टा, अम्बेडकरनगर का पावरलूम, अमेठी का बिस्कुट सुलतानपुर का मूंज के बने फर्नीचर, गोरखपुर का टेराकोटा, कुशीनगर की काष्ठ कलाकृतियां, देवरिया के प्लास्टिक के तोरण द्वार, महाराजगंज फर्नीचर, झांसी सॉफ्ट ट्वायज जालौन के हैंडमेड पेपर, ललितपुर की कृष्ण की मूर्ति, कानपुर नगर का चमड़ा उत्पाद, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज का आलू उत्पाद, मिर्जापुर, भदोही का कालीन उद्योग आदि सरकार की वरीयता में है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों में जाने का भी रिकार्ड बनाया है। इन यात्राओं का मकसद भी विकास से ही संबंधित था। वह जमीनी स्तर को सच्चाई देखना चाहते थे। आमजन से उन्होंने संवाद कायम किया। स्थानीय समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ली। इस जानकारी का उपयोग एक जिला एक उत्पाद में होगा।
आवश्यकता के अनुरूप कई जिलों में कई बार गए। योगी ने इस अंधविश्वास को भी तोड़ा कि नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री को अपने पद से हटना पड़ता है । इसी मान्यता के चलते पूर्व में कुछ मुख्यमंत्री नोएडा जाने से बचते रहे, लेकिन योगी नोएडा गए। पच्चीस दिसंबर को मोदी की नोएडा यात्रा से पहले वह इंतजामों का जायजा लेने वहां गए थे। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री ने पहले ही अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे कि वह राज्य के हर जिले का दौरा करेंगे।
प्रशासन को ऊर्जावान बनाएंगे और विकास कार्य तेजी से हों, यह सुनिश्चित करेंगे। वह यह भी सुनिश्चित करने में लगे हैं कि केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाएं जरूरतमंदों और वंचित लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचें। इस प्रकार योगी आदित्यनाथ ने बहुत मेहनत और सुनियोजित ढंग से उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है। विकास से संबंधित सभी मोर्चो पर उन्होंने एक साथ मजबूती से कार्य किया। योगी की कार्यशीली से उम्मीद है कि सभी योजनाओं के समय से उद्घाटन भी होने लगेंगे।







