डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार को गरीबों के लिए समर्पित बताया था। अब उनके इस कथन के क्रियान्वयन को देखा जा सकता है। मोदी की लखनऊ यात्रा इसी का उत्सव बन गई। वंचितों को बराबरी पर लाने और उनका जीवन स्तर उठाने का मंसूबा मोदी ने बनाया था। इसके लिए केंद्र सरकार ने अनेक योजनाएं शुरू की थी। इनमें तीन योजनाओं की आज तीसरी वर्षगांठ थी। मोदीं ने स्वयं इसकी जानकारी ली। वह देश के लाभार्थियों से मिले। मोदी का जन्म गरीब परिवार में हुआ था।मूलभूत सुविधाओं के अभाव का उन्होंने सामना किया है। शायद यही कारण था कि उन्होंने अपना जीवन समाज सेवा में लगा दिया। बेघर लोगों का दर्द वह समझते है। इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना लागू की। मोदी ने भारत को विकसित देश बनाने का भी संकल्प लिया था। उन्होंने इस दिशा में भी प्रयास किये। अमृत योजना, शहरी विकास योजना, स्मार्ट सिटी योजना भारत को विकसित बनाने की दिशा में अहम कदम है। जिनपर बहुत तेजी से कार्य हुआ है।
उत्तर प्रदेश की स्थिति कुछ अलग थी। डेढ़ वर्ष पहले यहां सपा सरकार थी। इस सरकार की केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उसने विकास से ज्यादा महत्व राजनीति को दिया। उसे लगता था कि इन योजनाओं से आमजन के विकास होगा तो उसका श्रेय केंद्र सरकार को मिलेगा। सपा सरकार के शहरी विकास मंत्री तो केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी का मजाक ही बनाते रहे। इस स्थिति में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद बदलाव आया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र की योजनाओं को प्राथमिकता से लागू किया। पिछली सरकार ने इन योजनाओं के प्रति जितनीं उपेक्षा की थी, उंसकी भी कसर योगी आदित्यनाथ ने पूरी कर दी। इस सरकार ने कम समय में अभूतपूर्व कार्य किया है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने सर्वाधिक मकान बनवाने और गरीबों को देने का रिकार्ड बना दिया।
शहरी विकास और स्मार्ट सिटी योजना अपने ढंग की सबसे बड़ी योजना है। मोदी ने प्रदेश की अड़तीस सौ करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यशाला के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना में अच्छा काम करने वालों को पुरस्कार दिया। स्मार्ट सिटी, अमृत योजना व प्रधानमंत्री आवास योजना की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई थी। देश के स्मार्ट सिटी मिशन में चयनित सौ शहरों के मेयर व अफसर शामिल थे। प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत व स्मार्ट सिटी मिशन योजना के अलग-अलग पैनल डिस्कशन एक-साथ हुए। इसमें देशभर से आए अधिकारी अपने-अपने यहां के अच्छे प्रोजेक्ट के बारे में बताया । इस कार्यशाला में करीब चौदह सौ से अधिक लोग शामिल हुए। कार्यशाला का समापन भी इसी दिन हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को धनराशि वितरित की गई।
लाभार्थियों के खाते में पांच सौ पचपन करोड़ रुपये भी ट्रांसफर किये। सभी को पचास पचास हजार रुपये प्राप्त हुए। इज ऑफ लिविंग इंडैक्स एंड डैशबोर्ड भी लांच करने के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना की सक्सेज स्टोरी का भी विमोचन किया। प्रधानमंत्री आवास योजना में सबसे ज्यादा ऋण देने वाले बैंकों को भी पुरस्कार दिया।साथ ही म्युनिसिपल बांड जारी करने वाले तीन शहरों को भी इन्सेंटिव दिया गया।स्मार्ट सिटी मिशन में भी अच्छा काम करने वाले तीन शहरों को भी अवार्ड मिला। मोदी आवास योजना से लाभान्वित होने वालों से मिले। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि प्रधानमंत्री आवास मिलने के बाद उनके जीवन में क्या बदलाव आए। इसके लिए गोरखपुर, वाराणसी, बिजनौर, आगरा व लखनऊ के लाभार्थियों को चुना गया है। लाभार्थी अपने-अपने जिलों में एनआइसी केंद्रों से प्रधानमंत्री से सीधे जुड़ें।
उत्तर प्रदेश में इक्कीस प्रतिशत लोग शहरों में रहते है। यह राष्ट्रीय स्तर से कम है। पहले शहरों के सुनियोजित विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। सपा सरकार में ग्यारह हजार आवास पैतीस हजार शौचालय सपा में बनाये गए। योगी सरकार ने डेढ़ वर्ष में पैतीस लाख शौचालय बनवा दिए गए। स्थानीय निकायों की आमदनी भी बढ़ी नगरीय आय अठारह से बढ़कर अठ्ठाइस प्रतिशत हो गई। सार्वजनिक यातायात की दिशा में योगी सरकार तेजी से कार्य कर रही है। छह लाख से ज्यादा एलईडी स्ट्रीट लाइट लगा दी। इससे आर्थिक बचत बढ़ी है। जाहिर है कि यह आयोजन सच्चे अर्थों में विकास उत्सव था। इसमें लोककल्याण के साथ ही भारत को विकसित देशों की सूची में पहुंचाने का विचार शामिल था। नरेंद मोदी और योगी आदित्यनाथ में इन विचारों और योजनाओं पर अमल का मंसूबा भी है।







