लखनऊ, 30 जुलाई 2018: कैंसर से जूझते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी आनंद कुमार प्रह्लाद का रविवार को निधन हो गया। वह 1 महीने से ज्यादा वक्त से बीमार थे। कुछ दिन केजीएमयू में इलाज कराने के बाद उन्हें 4 दिन पहले ही लोहिया संस्थान के आंकोलाजी विभाग में शिफ्ट किया गया था।
बता दे, कि 53 वर्षीय आनंद का पूरा जीवन रंगमंच को ही समर्पित रहा है। 30 साल पहले वह अपने घर संडीला से हर रोज लखनऊ आकर थिएटर के लिए काम कर रहे थे। अभिमंच कला एकांश की स्थापना कर उन्होंने कई नाटकों का निर्माण किया और निर्देशन भी किया।
वह लखनऊ में रंगमंच को जीवित रखने वाले नामों में शामिल थे।फिर भी उन्हें सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली थी। उनके आखिरी समय में उनको आर्थिक तंगी ने घेर रखा था। जिसके चलते उनके इलाज में भी काफी बड़ी मुश्किलें आ रही थी। आनंद दुनिया छोड़ने के बाद भी समाज को अपना योगदान दे गए हैं, उनकी अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनका शरीर मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाए।
उन्होंने अपने फेसबुक वॉल लिखा था-
हर व्यक्ति का किसी चीज़ को देखने का अपना नजरिया है अपनी क्षमताएं हैं अपना दायरा । इन सब से बढ़कर अपने संस्कार, अध्ययन मनन और चिंतन अलग । सम्भवतः मैं क्या कोई भी अछूता नही मन की इस दुर्बलता से।
पर एक दायित्व भी है कि जब हम एक कृति का निर्माण कर उसे प्रेक्षकों के सामने लाएं, तब इस कृति को सहज आत्मसात कर लिया जाए। यही किसी भी प्रस्तुति की कसौटी भी है ।
आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है, आप निराश न होंगे।
मेरी नवीन प्रस्तुति में आप सादर आमंत्रित है-
वाराणसी: विक्षुब्ध है मन
न वो शहर न वैसे लोग न वो पुराना चुम्बकीय आकर्षण इतने पैसे के आवागमन के बावजूद मंदिर व घाटों की दयनीय अवस्था
सबके साथ नशे को adventure मान कर उसी में तरक्की ढूंढती युवा पीढ़ी
विक्षुब्ध है मन —
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