एक मनुष्य किसी गांव को जा रहा था। भूख प्यास का मारा वह थकाहरा एक पेड़ के नीचे विश्राम करने को लेट गया। पेड़ की ठंडी छाया में उसका मन बड़ा प्रसन्न हुआ। वह कल्पना करने लगा। ‘काश’ यहां पीने के लिए पानी होता। इतने में ही उसने देखा कि एक ठंडा- ठंडा पानी का झरना फूट पड़ा।
उसने पानी पीकर प्यास बुझाई फिर उसने सोचा कुछ खाने को होता है तो कैसा रहता है। इतने में ही एक स्वादिष्ट पदार्थों से भरा हुआ थाल आ गया। उसने भोजन करके सोने के लिए सैया की कल्पना की। तो एक पल में वस्त्र बिछा हुआ पलंग दिखाई दिया। इन सब घटनाक्रम से उसे महसूस हुआ कि कहीं यहां कोई मायावी राक्षस तो नहीं! इतने में एक राक्षस सामने आ खड़ा हुआ।
उसने सोचा यह मुझे खा न जाए! इस विचार के साथ ही राक्षस उस यात्री को खा गया। दरअसल वह कल्पवृक्ष था जो मन की इच्छा के अनुसार फल देता था। मनुष्य का संकल्प एवं मनोबल एक प्रकार से कल्पवृक्ष ही है। उसका सदुपयोग करने वाला ही जीवन लक्ष्य प्राप्ति का उद्देश्य पूर्ण कर सकता है।








2 Comments
Hi there mates, its fantastic post about tutoringand completely defined, keep it up all the time.
Right here is the right webpage for anyone who really wants to understand this topic.
You realize so much its almost hard to argue with you (not that I actually will
need to…HaHa). You definitely put a fresh spin on a topic that has been discussed for a long time.
Great stuff, just excellent!