डॉ दिलीप अग्निहोत्री
क्रिकेट और विपक्ष की सियासी जिंदगी को इमरान खान ने अपने अंदाज में जिया। उसमें रंगीनियत थी। जब तक भुट्टो और शरीफ परिवार का वर्चस्व रहा, तब तक इमरान की पार्टी मुख्य मुकाबले से बाहर थी। हालात बदले, जिसके चलते इमरान आज प्रधानमंत्री हैं। अब वह पाकिस्तान की हकीकत से रूबरू है। चंद दिनों में ही उन्हें महसूस होने लगा कि यह जिंदगी बिल्कुल अलग है। आवाम सुधार की उम्मीद लगाए बैठा है। इमरान के सामने बदहाल पिच है। इस पर भी सेना का नियंत्रण है। उसका ही निर्णय अंतिम होता है। प्रधानमंत्री अपनी मर्जी से बोलिंग,बैटिंग ,फील्डिंग कुछ नहीं कर सकता। वह बिना सेना के इशारे से रन लेने को दौड़ भी नहीं सकता। इमरान को अपनी लाचारी का भी अनुभव हो गया। चीन के विरुद्ध दिए गए बयान पर चंद घण्टे भी कायम नहीं रह सके। उन्हें अपना बयान बदलने को बाध्य होना पड़ा।प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान ने बहुत कुछ समझ लिया। उन्होंने देखा कि सबसे बड़ा हितैषी चीन भी पाकिस्तान के साथ बेईमानी कर रहा है, अमेरिका के अपने स्वार्थ है, विदेशों की सहायता से अर्थव्यवस्था चल रही है। अमेरिका,चीन हाँथ खींच लें, तो पाकिस्तान के तबाह होने में देर नहीं लगेगी। आतंकवाद के विरुद्ध अभियान के नाम पर सेना और प्रशासन ने अरबों रुपये डकार लिए। इसका कोई हिसाब नहीं है। आतंकवाद पहले की तरह फल फूल रहा है। तीन महीने पहले वहाँ मात्र दस अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बची थी। अभी भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। विदेशी कर्ज इक्यानबे अरब डॉलर हो गया है। पाकिस्तान के कर्ज और जीडीपी का अनुपात सत्तर प्रतिशत है।
देश के चालू खाते का घाटा बयालीस प्रतिशत बढ़ कर अठारह अरब डॉलर पर है। एक तिहाई अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज पर आधारित है। आतंकवाद वीरोधी अभियान के नाम पर एक सौ अठारह अरब डॉलर कहा खर्च हुए, इसका कोई हिसाब नहीं है। पाकिस्तान की खराब अर्थव्यवस्था को देखते हुए मूडीज ने उसकी क्रेडिट आउटलुक रेटिंग घटा कर निगटिव कर दी है। पाकिस्तान में आर्थिक गलियारे पर चीन की चालबाजी पर बहस शुरू हो गई है। चीनी कंपनियों को टैक्स में छूट दी जा रही है। इसका नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ रहा है। चीन की चाल से पाकिस्तान की कंपनियों को घाटा हो रहा है। इस परियोजना पर चीन के कर्ज ने पाकिस्तान को गहरे संकट में फंसा दिया है।
चीन पाकिस्तान में सीपीईसी परियोजनाओं में साठ अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। धन के अभाव में कई जगह परियोजना का काम रोक दिया गया है। इसमें चीनी कंपनियां भी शामिल हैं। पाक अधिकृत कश्मीर से निकलने वाले चीन-पाक आर्थिक गलियारे से भी पाकिस्तान को नुकसान हो रहा है। इमरान मानने लगे है कि चीन ने धोखा दिया है। इस परियोजना में पाकिस्तान का कोई लाभ नहीं है।
चीन-पाक आर्थिक गलियारे को लेकर किए गए समझौते से चीनी कम्पनियां भारी मुनाफा कमा रही है। इस प्रकरण से इमरान पर सेना के दबाब प्रमाणित हुआ। पहले इमरान ने कहा कि आर्थिक गलियारे पर चीन की नीति से पाकिस्तान को बहुत नुकसान हो रहा है। उनकी बात से लग रहा था कि वह इस परियोजना की समीक्षा करेंगें। लेकिन अगले ही बयान में ही इमरान पलट गए।
उन्होंने विरोध करना छोड़ दिया, और उसकी हिमायत करने लगे। इमरान ने संशोधित बयान में कहा कि चीन के साथ मित्रता पाकिस्तान की विदेश नीति की आधारशिला है। आर्थिक गलियारा परियोजना को पूरा किया जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। इसमें सुधार की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं है। यहां प्रधानमंत्री बदलते है , लेकिन सेना के नियंत्रण वाला निजाम नहीं बदलता। ये सभी लोग कॉकस बना कर पाकिस्तान को लूट रहे है। इमरान भी इस माहौल को बदल नहीं सकते।








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