डेढ़ सौंवी जयंती पर महात्मा गांधी के संग अटल व नीरज पर होंगे विविध आयोजन
लखनऊ, 26 सितम्बर 2018: राणाप्रताप मार्ग मोतीमहल वाटिका लान लखनऊ में वर्ष 2003 से निरंतर होता आ रहा सोलहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला 28 सितम्बर से सात अक्टूबर तक चलेगा। दि फेडरेशन आॅफ पब्लिशर्स एण्ड बुकसेलर्स एसोसिएशन्स इन इण्डिया, नई दिल्ली के सहयोग से हो रहे के.टी.फाउण्डेशन व फोर्सवन का महात्मा गांधी की 150वीं जयंती की थीम पर आधारित यह आयोजन बच्चो-बड़ों सभी को समर्पित होगा। उद्घाटन मुख्यअतिथि के तौर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा.महेन्द्रनाथ पाण्डेय 28 सितम्बर को शाम पांच बजे करेंगे। निःशुल्क प्रवेश वाले मेले में पुस्तक प्रेमियों को हमेषा की तरह न्यूनतम 10 फीसदी की छूट मिलेगी।
यशपाल, भगवती बाबू और अमृतलाल नागरजी की इस साहित्यिक नगरी का बहुप्रतीक्षित वार्षिक उत्सव बन चुके इस सोलहवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के बारे में आयोजक फाउण्डेशन के संयोजक मण्डल मनोज सिंह चंदेल, आस्था ढल व आकर्षण जैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि वर्चुअल वल्र्ड की ओर बढ़ती दुनिया में किताबों का महत्व पहले से बढ़ा ही है। मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र कहलाने वाली किताबें एक लम्बे अरसे से व्यक्ति और समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाती आ रही हैं। मेले में सूबे का खेलों में नाम रौशन करने वाली एथलीट सुधा सिंह को पहली अक्टूबर को प्रदेष गौरव सम्मान से नवाजा जायेगा। अटल बिहारी बाजपेयी और गीतकार नीरज पर भी विशिष्ट कार्यक्रम होंगे। उर्दू भाषा सिखाने की सप्ताह भर की कार्यशाला के संग अंतिम दिन अरबी की कार्यशाला होगी।
मेले में हमेशा की तरह इस वर्ष भी स्थानीय लेखकों के लिए अलग से निःशुल्क स्टाल की व्यवस्था है, जहां के अपनी पुस्तकें प्रदर्शन व बिक्री के लिए रखवा सकेंगे। यहां गांधी बाल एवं युवा मंच पर ड्राइंग, फैंसी ड्रेस, नृत्य-गायन, श्लोक वाचन, वादन, लेखन, क्विज, खादी परिधान आदि की बाल व नवयुवा प्रतियोगिताओं का अलग रंग दिखाई देगा। मुख्य सांस्कृतिक मंच पर पुस्तकों के विमोचन, लेखक से मिलिए, साहित्यिक परिचर्चा कार्यक्रम और कवि सम्मेलन-मुशायरा आदि विविध मनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रम हर दिन का आकर्षण होंगे। मेले के समापन समारोह में सात अक्टूबर की शाम चुनिंदा स्टाल धारकों व प्रमुख सहयोगियों को अतिथिगण सम्मानित करेंगे। इस मौके पर समाचार पत्र-इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधियों का आभार प्रकट करते हुए संरक्षक मुरलीधर आहूजा, डा.अमिता दुबे, आकर्ष चंदेल, ज्योति किरन रतन भी अपने विचार व्यक्त करने के साथ उपस्थित रहे।







