- संघर्ष समिति ने महामहिम श्री राज्यपाल उप्र से मिलने का भी मांगा समय
- संघर्ष समिति की मांग सभी रिवर्ट दलित कार्मिकों की हो पुनर्बहाली और उप्र में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(7) हो अविलम्ब बहाल
लखनऊ, 03 अक्टूबर 2018: पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा सुनाये गये ऐतिहासिक फैसले को लेकर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र संयोजक मण्डल द्वारा आज प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव व प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) को एक पत्र भेजकर अविलम्ब प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था 15-11-1997 से बहाल करने व सपा सरकार में पदों व वरिष्ठता में लगभग 2 लाख दलित कार्मिक जिन्हें रिवर्ट किया गया था, उन्हें पूर्ववत् उनके पदों पर स्थापित करने की मांग की।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र में यह मुद्दा उठाया है कि विगत दिनों संविधान पीठ द्वारा दिये गये फैसले में एम नागराज केस में पूर्व में लगाये गये राइडर क्वान्टीफेबिल डाटा व बैकवर्डनेस को इन्दिरा साहनी केस में दिये गये फैसले के आधार पर निष्प्रभावी कर दिया गया। ऐसे में अब उप्र में दलित कार्मिक जिन्हें रिवर्ट किया गया था, उनकी पुनर्बहाली जरूरी है। संघर्ष समिति ने आरक्षण अधिनियम-1994 की धारा-3(7) को भी अविलम्ब प्रदेश में बहाल किये जाने की मांग उठायी है, जिससे प्रदेश में दलित कार्मिकों के लिये पदोन्नति का रास्ता साफ हो सके जिससे दलित कार्मिकों के साथ न्याय हो पाये।
आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, प्रेम चन्द्र, अशोक सोनकर ने कहा कि संघर्ष समिति द्वारा आज एक पत्र प्रदेश के महामहिम श्री राज्यपाल जी को भेजकर मुलाकात का समय मांगा गया है।
संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा जब तक उप्र में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल नहीं हो जाती तब तक लगातार आन्दोलन जारी रहेगा। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दलित कार्मिकों के रिवर्शन का जब आदेश दिया गया था तो सभी विभागों में एक सप्ताह में रिवर्शन कर दिया गया था और अब जब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का निर्णय आ गया है तो सरकार ने चुप्पी साध रखी है जो अपने आप में चिन्ता का विषय है।







