- आरक्षण समर्थकों ने मान्यवर कांशीराम को यादकर सभी को एकजुट होकर मान्यवर साहब के बताये हुए रास्ते पर चलने का किया आहवान
- मान्यवर साहब के रास्ते पर चलकर एकजुट होकर करो संघर्ष केन्द्र व उप्र की सरकार को विवश होकर पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था करनी होगी बहाल
लखनऊ, 09 अक्टूबर 2018: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र संयोजक मण्डल के तत्वाधान में बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम साहब की 12वें परिनिर्वाण दिवस पर आरक्षण समर्थकों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर याद किया। इस अवसर पर आरक्षण समर्थकों ने कहा कि मान्यवर कांशीराम साहब की ही देन है कि आज दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिक एकजुट होकर अपनी आवाज बुलन्द कर रहे हैं।
वह दिन सभी को याद है जब मान्यवर साहब ने डीएस-4 के नाम से कार्मिकों का संगठन बनाकर सभी को यह दिखा दिया कि जहां चाह है वहां राह है। अब आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति को भी मान्यवर साहब के बताये हुए रास्ते पर चलकर सभी को एकजुट करके व्यापक जनआंदोलन खड़ा करना है। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक पिछले कई वर्षों से पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन बिल को पास कराने के लिये संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है।
इस अवसर पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, प्रेमलता, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, एसपी सिंह, राजेन्द्र कुमार ढोलका, लेखराम, दिनेश कुमार, प्रेमचन्द्र, अशोक सोनकर, राधा किशन राव, राजेश पासवान, सुनील कनौजिया ने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी आरक्षण समर्थकों को एकजुट होकर अपने अधिकार के लिये मान्यवर कांशीराम साहब के रास्ते पर चलकर सरकारों को पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को बहाल कराने के लिये विवश करना होगा।
उन्होंने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि उप्र की सरकार अभी आरक्षण अधिनियम-1994 की धारा 3(7) को बहाल तक नहीं किया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पीठ के निर्णय के बाद भी वर्तमान में उप्र में पदोन्नति में आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है, जो केन्द्र की मोदी सरकार व योगी सरकार की पोल खोल रही है। अभी भी समय है कि सरकारों को प्रदेश के दलित कार्मिकों का हक बहाल करना चाहिए, जिससे दलित कार्मिकों में व्याप्त गुस्सा शान्त हो।







