डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और कुलाधिपति राम नाईक के प्रयासों से यहां के सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह आयोजित होने लगे हैं। नए विश्विद्यालय अपवाद स्वरूप है। ऐसे समारोह विद्यार्थी, शिक्षक, प्रशासन सभी को आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करते है। लखनऊ विश्विद्यालय के दीक्षांत समारोह में राम नाईक स्वयं शामिल हुए। उन्होंने होनहार विद्यार्थियो को पुरष्कृत किया। उनका मार्गदर्शन प्रेरणादायक था।नाईक ने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं रोजगार ढूंढने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने के समर्थ बनें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्किल इण्डिया, स्टार्ट अप इण्डिया एवं स्टैण्ड अप इण्डिया जैसी अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारम्भ किया है जो स्वावलम्बी बनाने के लिये स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने यूपी इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से 1,045 एमओयू और लगभग रूपये 4,28 लाख करोड़ के निवेश से प्रदेश में रोजगार के नये स्रोत खोलने का प्रयास किया है। प्रदेश सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना से भी लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि अपनी नव-कल्पनाशीलता से सरकारी योजनाओं का लाभ उठायें तथा उद्योगों की स्थापना करके देश एवं प्रदेश की प्रगति में योगदान करें।
राज्यपाल ने इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि दीक्षांत समारोह में ली गयी प्रतिज्ञा का पालन करें। प्रतिज्ञा लेना सरल है पर उसको निभाना कठिन है। इच्छाशक्ति से कठिन बात भी निभाई जा सकती है। माता-पिता एवं गुरूजनों का आदर करें क्योंकि उन्होंने आपके पंखों में ताकत दी है। उपाधि अब तक के ज्ञान के लिये प्रदान की गयी है। ज्ञान प्राप्त करने की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती है। स्वयं को अद्यतन ज्ञान से परिपूर्ण रखें। प्रमाणिकता और पारदर्शिता से असफलता को सफलता में बदला जा सकता है। असफलता से परेशान न हों बल्कि चिंतन करके फिर से सफलता प्राप्त करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जीवन में ‘शार्टकट’ से सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती।
राज्यपाल ने छात्राओं की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय में कुल 31,793 उपाधियाँ प्रदान की गयी हैं जिनमें 11,416 छात्र एवं 20,377 छात्राएं हैं अर्थात् कुल उपाधियों का 64 प्रतिशत लड़कियों एवं 36 प्रतिशत लड़कों ने उपाधियाँ प्राप्त की हैं। इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर 192 पदकों में से 149 पदक अर्थात 78 प्रतिशत पदक छात्राओं ने प्राप्त किये हैं जबकि मात्र 43 पदक अर्थात् 22 प्रतिशत पदक छात्रों ने अर्जित किये हैं। राज्यपाल ने बताया कि इस शैक्षिक सत्र में अब तक सम्पन्न 16 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में 7.67 लाख उपाधियाँ प्रदान की जा चुकी हैं जिनमें 4.32 लाख उपाधियाँ अर्थात् 56 प्रतिशत उपाधियाँ छात्राओं को मिली हैं। अब तक वितरित किये गये 923 पदकों में छात्राओं को 590 अर्थात् 64 प्रतिशत पदक प्राप्त हुये हैं। उन्होंने कहा कि यह समाज को सुख एवं समाधान देने वाला है। उल्लेखनीय है कि गत शैक्षणिक वर्ष में सम्पन्न हुये दीक्षांत समारोह में राज्य विश्वविद्यालयों में 15.60 लाख उपाधियाँ वितरित की गयी थी जिनमें 51 प्रतिशत उपाधियाँ छात्राओं को प्राप्त हुई। उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक प्राप्त करने वालों में 66 प्रतिशत लड़कियाँ थी। जाहिर है कि लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए यह गौरव का अवसर था।
विद्यार्थी विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान और शिक्षा के द्वारा ही अपने सपनों और आकांक्षाओं को ऊंची उड़ान प्रदान कर सकते हैं। छात्र-छात्राएं अपने विषय की बारीकियों से भलीभांति अवगत रहें। सीखा हुआ ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता। छात्र जीवन में सतत सीखने का जूनुन होने चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं में यथोचित ज्ञान, कौशल और दक्षता का पोषण करें। सच्चे अर्थों में उन्हें गुणी, शिक्षित, संस्कारवान, स्वावलम्बी तथा वर्तमान की चुनौतियों को स्वीकार करने की क्षमता का विकास करने के साथ-साथ उन्हें समुचित रोजगार भी मुहैया कराये। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की आधारशिला एवं राष्ट्र उत्थान की संवाहक होती है।
किसी भी देश की उन्नति की परिभाषा उस देश की युवा पूंजी में निहित होती है। हमारे लिये यह गौरव का प्रसंग है कि हमारा देश संपूर्ण विश्व में युवाओं की बहुलता का देश है। देश की आबादी का 50 प्रतिशत हिस्सा 25 वर्ष से कम आयु के युवाओं का है। वर्ष 2020 तक देश की औसत आयु 29 वर्ष होगी जो चीन की 35 वर्ष और जापान की 48 वर्ष की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही हमारी पूंजी है जिनकी ऊर्जा के समुचित दोहन से हमारा देश विश्व के मानचित्र पर अपना परचम फहरा सकता है।







