डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तराखंड देवभूमि के रूप में विख्यात रहा है। यहां से लेकर मानसरोवर तक एक ही श्रृंखला थी, जो आध्यात्मिक चेतना का सिद्ध स्थल माना जाता था। हमारे ऋषियों ने ज्ञान का जो प्रकाश दिया, उसी ने भारत को विश्वगुरु बनाया। आदि शंकराचार्य ने भी चार में से एक पीठ की स्थापना के लिए इसी क्षेत्र को चुना। उस समय यह कितना दुर्गम रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। इसी के साथ भारत विश्व की आर्थिक महाशक्ति भी था। उत्तराखंड प्राकृतिक संपदा से सम्पन्न रहा है। समय के साथ विकास भी स्वभाविक और अपरिहार्य होता है।उत्तराखंड की धरोहर को सुरक्षित रखते हुए विकास के प्रयास होने चाहिए थे। लेकिन इस दृष्टि से समुचित ध्यान नहीं दिया गया। बांध, जल विद्युत परियोजनाओं की एक सीमा होनी चाहिए थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्वेस्टर्स समिट में इसका उल्लेख किया। उन्होंने सौर ऊर्जा, वैकल्पिक ऊर्जा पर ज्यादा जोर देने की बात कही। ऐसा करने से प्रकृति का दोहन नहीं करना पड़ेगा। नरेंद्र मोदी ने इसी के साथ उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत व विशेषता का उल्लेख किया। यह विश्व शांति का भी मार्ग है।

प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में सौर ऊर्जा पर सर्वाधिक फोकस होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा विद्युत उत्पादन का सबसे बड़ा सेक्टर बनने जा रहा है। अगले एक दशक तक चालीस प्रतिशत विद्युत उत्पादन रिन्यूवल एनर्जी का होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय वन वर्ल्ड, वन सन और वन ग्रिड का सिद्धांत का है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और दिशा निर्देश से अनेक राज्य निवेश को प्रोत्साहन देने में गम्भीरता से प्रयास कर रहे है। उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश,राजस्था न, महाराष्ट्र,आदि अनेक राज्य इस दिशा में बेहतरीन कार्य कर रहे है।उत्तर प्रदेश में तो इन्वेस्टर्स समिट के कुछ दिन बाद ही साठ हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास भी हो गया। वस्तुतः नरेंद्र मोदी के निर्देश से इन सभी राज्यों ने अपने यहां पहले निवेश के अनुकूल माहौल बनाया। अनेक कारगर कदम उठाए। इसके बाद निवेश के प्रस्ताव आमंत्रित किये। उत्तराखंड की सरकार ने भी यही किया।

राज्य सरकार ने इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के लिए सिंगल विंडों क्लीयरेंस शुरू कर दिया है। इसके तहत पन्द्रह दिन में उन्हें क्लीयरेंस मिल जाएगी। इंडस्ट्री को कई तरह की छूट और रियायत की व्यवस्था की गई है। इस पर भी पन्द्रह दिन के भीतर मंजूरी दी जाएगी। राज्य सरकार ने इस समिट से सत्तर हजार करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य बनाया था। यह सामित में हासिल कर लिया गया। इस समिट में फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, होटल और इंडस्ट्री आदि क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा
निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए चार वर्ष में दस हजार निर्णय करना सामान्य बात नहीं है। नरेंद्र मोदी ने इन पर स्वयं ध्यान दिया। जिस प्रकार जड़ता, आर्थिक अनियमितता का माहौल बनाया गया था, उसे दूर किया। सौ हवाई अड्डे, इतने ही राष्ट्रीय जलमार्ग, चार सौ रेलवे स्टेशन का आधुनिकरण अंततः निवेश और औद्योगिक प्रगति में सहायक होगा। ऐसे प्रयासों से भारत निवेश के अनुकूल माहौल बनाने में बयालीस पायदान ऊपर आ गया है। मेक इन इंडिया वैश्विक रूप में स्थापित हो गया है। सूक्ष्म,लघु और मध्यम दर्जे के उद्योगों को आसानी से एक करोड़ रुपये का ऋण देने की व्यवस्था की गई है।
पिछले चार वर्षों के दौरान उत्तराखंड में यातायात व सम्पर्क बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए गए हैं। हाईवे, रेलवे, एयरवे से उत्तराखंड को जोड़ा गया है. गांव-गांव में पक्की सड़कें बनाई जा रही है। चारधाम ऑल वेदर रोड ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन का तेजी से चल रहा है।इसका लाभ यहां के टूरिज्म सेक्टर को मिलेगा। राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दे दिया है। पहली बार राज्य तेरह जिलों में तेरह नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाए जा रहे हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार ने चौदह हजार से ज्यादा कानून खत्म किए गए है। टैक्स से जुड़े सुधारों को पारदर्शी बनाया गया है। बैंकिंग सिस्टम को भी ताकत मिली है। जीएसटी के तौर पर हमने सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म किया। नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीएसटी ने देश को सिंगल मार्केट दिया। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भी रिकॉर्ड गति से आगे बढ़ रहा है। पिछले वर्ष ही भारत में करीब करीब दस हजार किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण हुआ है। प्रतिदिन सत्ताईस किलोमीटर की गति से काम हो रहा है। यह पहले की सरकारों की तुलना में दुगना है। रेलवे लाइन के निर्माण में भी दोगुनी गति से काम हो रहा है।
उत्तराखंड की इन्वेस्टर्स समिट को कई अर्थों में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। प्राकृतिक सम्पदा से सम्पन्न इस राज्य के विकास हेतु विशेष सावधानी पर सहमति बनी। असंतुलित विकास से यहां की समस्याएं बढ़ी है। प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हुई है। नदी के प्रवाह क्षेत्र में निर्माण कार्यो से बचना होगा। पर्यटन को यहां प्रमुख उद्योग के रूप में विकसित करने का निवेशक प्रयास करेंगे। विरासत और विकास दोनों क्षेत्रों में उत्तराखंड कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।







