- उपभोक्ता परिषद ने निजी घरानों की सीएजी आडिट बिजली कम्पनियों की अक्षमता का खामियाजा उपभोक्ताओं पर न डालने सौभाग्या उदय सहित अन्य योजनाओं में किसी भी भ्रष्टाचार पर सीधे सीबीआई व सीईए से स्वतंत्र जांच सहित दर्जनों बिन्दुओं पर दिया सुझाव
- बिजली कम्पनियों के विघटन के बाद निराशाजनक परिणाम पर समीक्षा कर पुनः एकीकरण किये जाने के प्राविधान की उठायी मांग
लखनऊ, 17 अक्टूबर 2018: विद्युत अधिनियम 2003 में प्रस्तावित संशोधन इलेक्ट्रिसिटी अमेन्डमेन्ट बिल 2014 व टैरिफ पाॅलिसी में प्रस्तावित संशोधन को लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज शक्ति भवन में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के साथ बैठक में एक 12 बिन्दु का जनहित ज्ञापन सौंपा। आज की बैठक में काफी सकारात्मक संदेश दिखे हैं।
उपभोक्ता परिषद द्वारा ऊर्जा मंत्री को सौंपे गये ज्ञापन में यह मुद्दा उठाया गया कि प्रस्तावित अधिनियम में एमओयू रूट के अन्तर्गत आने वाले सभी उत्पादन गृहों की बिजली दरें जो काफी अधिक हैं, को वर्तमान परिवेश में मार्केट दर पर पुनसर्मीक्षा का प्राविधान हो, अधिनियम में यह भी व्यवस्था प्राविधानित की जाये कि सभी निजी घरानों के उत्पादन गृहों की अनिवार्य रूप से सीएजी से आडिट कराने का प्राविधान हो, बिजली दर का निर्धारण उपभोक्ताओं की आवश्यकता और वह उपभोक्ता जो बिजली का उपभोग कच्चे माल के रूप में करते हैं उसके आधार पर तय हो, बिजली कम्पनियां बनने के बाद लगातार घाटा हो रहा है, ऐसे में बिजली कम्पनियों के एकीकरण पर विचार हो, वितरण पारेषण सहित उत्पादन के क्षेत्र में अनिवार्य रूप से 75 प्रतिशत भागीदारी सार्वजनिक क्षेत्र की हों, किसानों की दरें कम रहें, इसलिये क्रास सब्सिडी को बढ़ाने का प्राविधान विद्युत नियामक आयोगों का कोई भी कार्मिक व बिजली कम्पनियों का कोई कार्मिक आपस में प्रतिनियुक्ति पर न भेजने हेतु सख्त प्राविधान होना आवश्यक है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आगे ऊर्जा मंत्री के सामने यह भी मुद्दा उठाया कि जब तक देश की कोई भी बिजली कम्पनी फायदे में न हो, उसे निजी व सरकारी कन्सल्टेन्ट रखने पर पूर्णतया प्रतिबन्ध हो, सौभाग्या सहित अन्य योजनाओं के अन्तर्गत गरीब व बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिये अनिवार्य रूप से सस्ती बिजली देने का प्राविधान और साथ ही बिजली कम्पनियों के अधिकारियों द्वारा किये गये गबन, भ्रष्टाचार व बिजली चोरी की वजह से घाटे की मार टैरिफ में बिल्कुल न पास करने का स्पष्ट प्राविधान होना अतिआवश्यक है।
केन्द्रीय योजनाओं सौभाग्या, उदय इत्यादि में किसी भी भ्रष्टाचार पर सीबीआई/केन्द्रीय सतर्कता आयोग/केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण से स्वतंत्र जोंच कराने का प्राविधान होना आवश्यक है। उपभोक्ता परिषद ने पूरे देश में भार के अनुसार मात्र एक ही टैरिफ श्रेणी पर विचार करने के पहले व्यापक अध्ययन कर सभी की राय लेने के प्राविधान बनाने पर भी चर्चा की।
ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि उपभोक्ता हित व प्रदेश हित में इन बिन्दुओं पर हम गम्भीरता से विचार करेंगे और पूरा मामला भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय के समक्ष प्रेषित करेंगे। प्रदेश सरकार हमेशा उपभोक्ताओं के हित में काम करते हुए उनके हितों के लिये नये कानून व सरल कानून बनाने की पक्षधर है, जिससे उपभोक्ताओं का उत्पीड़न न हो सके।






